पटना: जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने प्रशांत किशोर 2015 के विधानसभा चुनाव से पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नजदीक आए. पॉलिटिक्स में उनकी एंट्री से पहले वो सियासी रणनीतिकार के तौर पर चर्चित रहे. हालांकि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र के साथ की और कई अफ्रीकी देशों में उन्होंने काम किया.

2011 में जब गुजरात के तत्कालीन सीएम और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्वेस्टमेंट समिट आयोजित किया, तब पहली बार प्रशांत किशोर से वो प्रभावित हुए. मोदी ने पीके (प्रशांत किशोर) के टैलेंट को पहचान कर उन्हें अपने साथ काम करने का ऑफर दिया. फिर वो मोदी के साथ ही अहमदाबाद में रहने लगे. 2012 के विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने अहम भूमिका निभाई.

तभी किशोर ने 200 की टोली के साथ सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (सीएजी) संस्था का गठन किया. सीएजी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के पक्ष में लहर बनाने में अहम भूमिका निभाई. मोदी चुनाव प्रचार की उनकी रणनीति से खासे प्रभावित थे. लेकिन पीएम बनने के बाद पीएमओ के भीतर खास तवज्जो नहीं मिलने से पीके में असंतोष घर कर गया औऱ वो टीम मोदी से अलग हो गए.

फिर उन्होंने सीएजी को भंग कर दिया और इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) का गठन किया. 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में आई-पैक ने नीतीश-लालू की जोड़ी के लिए चुनाव प्रचार की रणनीति बनाई, जो बेहद सफल रही.

प्रशांत किशोर से जुड़ी 15 और बातें

1. 41 साल के प्रशांत किशोर का जन्म 1977 में बिहार के बक्सर जिले में हुआ, हालांकि वो मूल रूप से रोहतास जिला के रहने वाले हैं.

2. प्रशांत के पिता डॉ. श्रीकांत पांडे पेशे से डॉक्टर हैं और बक्सर में मेडिकल सुपरिटेंडेंट भी रह चुके हैं. वहीं मां इंदिरा पांडे हाउस वाइफ हैं. बक्सर के अहिरौली रोड में उनका मकान है, हालांकि बक्सर में प्रशांत का परिवार कम ही रहता है.

3. प्रशांत किशोर दो भाई हैं, जिनमें से बड़े भाई अजय किशोर का खुद का कारोबार है. प्रशांत किशोर की दो बहनें भी हैं.

4. प्रशांत किशोर की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई बिहार में ही हुई है. उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा बक्सर से ही पास की और इंटर पटना से पास किया. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने बिहार से बाहर का रुख किया.

5. बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रशांत किशोर ने इंजीनियरिंग की भी पढ़ाई की है. इंजीनियरिंग करने के बाद पीके हैदराबाद चले गए और तकनीकी शिक्षा हासिल की.

6. पीके ने पढ़ाई की, इसके बाद उन्होंने यूनिसेफ में नौकरी ज्वाइन की और ब्रैंडिंग का जिम्मा संभाला.

7. साल 2011 में प्रशांत किशोर भारत लौटे तो उनकी पहचान गुजरात के चर्चित आयोजन ‘वाइब्रेंट गुजरात’ से हुई. वो न केवल इस आयोजन से जुड़े, बल्कि इस आयोजन की ब्रांडिंग का जिम्मा भी खुद संभाला.

8. 2011 में इस सफल आयोजन के बाद वो वहां के सीएम नरेंद्र मोदी के काफी करीबी बन गए और इसका फायदा उन्हें 2014 के चुनाव में मिला.

9. 2014 के लोकसभा चुनावों से पीके की पहचान बनी. इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के लिए काम किया और भाजपा समेत एनडीए की बड़ी जीत के लिए प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति को श्रेय दिया गया.

10. 2014 के लोकसभा चुनाव में पीके ने प्रचार के लिए ‘चाय पर चर्चा’ और ‘थ्री-डी नरेंद्र मोदी’ का कंसेप्ट दिया. ये दोनों अभियान काफी सफल रहे और नतीजन बीजेपी सत्ता तक पहुंची.

11. साल 2015 में बिहार विधानसभा के चुनाव में प्रशांत किशोर ने एनडीए को छोड़कर महागठबंधन के लिए काम किया और यहां भी वो जीत दिलाने में सफल रहे.

12. प्रशांत किशोर हमेशा से नीतीश के करीबी माने जाते रहे हैं. शायद यही कारण है कि उन्हें पार्टी ने पहले ही कैबिनेट स्तर के मंत्री का दर्जा और सुविधाएं मिली.

13. प्रशांत किशोर के जेडीयू में शामिल होने के बाद अंदरखाने से जो खबर आ रही हैं, उसके मुताबिक बक्सर सीट से जेडीयू उनको मौका दे सकती है, हालांकि इसके बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिल सकी है.

14. प्रशांत किशोर ब्राह्मण जाति से आते हैं. ऐसे में जेडीयू में एंट्री के बाद पार्टी की नजर सवर्णों के वोट बैंक पर ही है.

15. प्रंशात किशोर को पीके के नाम से भी जाना जाता है. बीजेपी के प्रचार में ‘मोदी लहर’ का नारा और अबकी बार- मोदी सरकार जैसे स्लोगन देने का श्रेय उन्हीं को जाता है.

Source: News18

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