6 महीने की ट्रेनिंग लेकर बन सकते हैं योगा टीचर, बिहार में यहां है बेहतरीन मौका

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योग को रोजगार से जोड़ने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआइओएस) ने एक नई पहल की है। संस्थान के एक एवं छह माह का ‘योग शिक्षक प्रशिक्षण’ पाठ्यक्रम पूरा कर युवा रोजगार पा सकेंगे। इसका संचालन रोहतास जिला सहित देशभर में स्थापित एनआइओएस के क्षेत्रीय एवं अध्ययन केंद्रों में किया जा रहा है।

राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षण संस्थान ने इसके लिए एक विशेष पाठ्यक्रम शुरू किया है। क्षेत्रीय केंद्र उप निदेशक डा. चुन्नू प्रसाद ने बताया कि ‘योग शिक्षक प्रशिक्षण’ कार्यक्रम योग विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम है। युवा जो ‘योग शिक्षक’ बनकर इसमें करियर बनाने की इच्छुक हैं, उनके लिए यह पाठ्यक्रम विकसित किया गया है। यह पाठ्यक्रम यौगिक अभ्यास और योग शिक्षा का गहन ज्ञान प्रदान करता है।

योगा ट्रेनिंग को ले केंद्र सरकार द्वारा स्कूलों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक संस्थानों में बतौर एक्सपर्ट योगा ट्रेनरों को नियुक्ति की जानी है। ‘योग शिक्षण’ में प्रमाणपत्र अर्जित करने के बाद अभ्यर्थी यौगिक संस्थान, योग प्रशिक्षण केंद्र, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सालय, विद्यालय-महाविद्यालय, स्वास्थ्य क्लब कारपोरेट जगत आदि में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।

अध्ययन योजना के अंतर्गत सिद्धांत स्तर पर 30 प्रतिशत, प्रशिक्षण स्तर पर 50 प्रतिशत और शिक्षार्थी पोर्टफोलिया 20 प्रतिशत में अंक विभाजित होंगे। अनुदेशक योजना स्व निर्देशित मुद्रित सामग्री के आधार पर होगी। अनुदेश योजना के अंतर्गत स्व निर्देशित मुद्रित सामग्री और श्रव्य-दृश्य सामग्री होगी।

सिद्धांत स्तर पर योग दर्शनशास्त्र, क्रिया विज्ञान, मानव शरीर, आहार और शुद्धि एवं व्यावहारिक योग पढ़ाया जाएगा। प्रायोगिक योग प्रशिक्षण में योगासन, प्राणायाम, ध्यान और योग शिक्षण कौशल शिक्षण पढ़ना पड़ेगा।

प्रवेश के लिए शैक्षिक योग्यता किसी भी मान्यता प्राप्त शिक्षा बोर्ड अथवा विश्वविद्यालय से 12वीं कक्षा पास होना चाहिए। दाखिले के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष या इससे अधिक होगी।

एनआइओएस में राष्ट्रीय पर खुले क्षेत्रीय एवं अध्ययन केंद्रों के माध्यम से सीधे दाखिले लिए जा सकते हैं। यह पाठ्यक्रम दो प्रकार का होगा। एक माह आवासीय पाठ्यक्रम 240 घंटे का होगा। छह माह का ओपन पाठ्यक्रम भी 240 घंटे का होगा। अवधि के दौरान 30 दिनों में तीन कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।

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