सुसाइड पर किताब लिखने वाली पटना की Swati Kumari अब मलेशिया में करेंगी लोगों को जागरूक

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Suicide Prevention के लिए जागरूक करती Swati Kumari 

लोग अक्सर ज़िन्दगी में हुए हादसे से टूट जाते हैं, लेकिन वहीं कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी कमजोरियों को अपमी ताकत बनाकर ज़न्दगी में आगे बढ़ते हैं और अपना मुकाम हासिल करते हैं। उन्हीं में से एक हैं बिहारी के नालंदा जिले की लेखिका Swati Kumari .

Suicide पर दो किताबें लिखने वाली Swati जुलाई में मलेशिया में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन और मलेशियन गवर्नमेंट की तरफ से आयोजित हो रहे इंटरनेशनल सुसाइड प्रिवेंशन कॉन्फरेंस में इंडिया की तरफ से ‘सुसाइड को कैसे रोका जा सकता है’ पर अपनी बात रखने जा रही हैं। स्वाति ने बताया की उनका एब्स्ट्रैक्ट एक्सेप्टेन्स और कांफ्रेंस में प्रेजेंट करने के लिए इनविटेशन लेटर मिल है।

साल 2013 में अपनी माँ को सुसाइड में खोने के बाद स्वाति बुरी तरह टूटी जरूर थीं, लेकिन फिर उन्होंने न केवल अपने आप को संभाला बल्कि अपने परिवार को भी उस हादसे से उबारने की पूरी कोशिश की। इतना ही नहीं, स्वाति ने डिप्रेशन और सुसाइड के खिलाफ लोगों को जागरूक करने में ठानी और इस काम में जुट गईं।

स्वाति बताती है की जब तक डिप्रेशन और सुसाइड प्रिवेंशन के खिलाफ आम लोगों को जागरूक नहीं किया जायेगा, समस्या और भी गंभीर होती चली जाएगी। आपको बताते चलें की WHO के अनुसार भारत में 2015 में पांच करोड़ (5,66,75,969) लोग डिप्रेशन का शिकार हुए और 7,88,000 लोगों की मृत्यु आत्महत्या से हुई। WHO के अनुसार आत्महत्या का प्रयास करने वालों की गिनती और बढ़ जाती अगर हज़ारों आत्महत्या का प्रयास करने वाले अपनी कोशिश में विफल न होते।

Swati Kumari

WHO ने अपनी 2012 की रिपोर्ट में कहा था की भारत में हर 3 सेकंड में एक आदमी आत्महत्या का प्रयास करता है। देखा जाये तो ये स्थिति बहुत ही भयानक है। पिछले कुछ सालों में स्कूल के छात्रों और युवकों में आत्महत्या की घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है।

स्वाति कहती हैं की आजकल की लाइफस्टाइल ने लोगों को अकेलेपन की ओर धकेल दिया है। अपनी परेशानियों को लोग खुद ही दूर काने की कोशिश करते रहते हैं। लेकिन हमारा परेशान और दुखी मन कई बार समस्याओं का समाधान सामने होने पर भी हमें नहीं दिखता और हम अपनी परेशानी दूसरों से नहीं बाँट पाते।

एक वक्त आता है की लगता है अब केवल मरना ही सभी समस्याओं का हल होगा, लेकिन ये सच नहीं है। किसी भी समस्या का हल ज़िंदा रहने पर ही खोजा जा सकता है। आत्महत्या करना कायरता नहीं है, लेकिन बुद्धिमानी भी नहीं।

Swati Kumari

सुसाइड प्रिवेंशन के लिए जागरूकता फ़ैलाने के लिए स्वाति ने बिहार के फेमस फोटोग्राफर सौरव अनुराज के साथ मिलकर ‘ Amayra – the essence of life ‘ आम की एक फोटो-स्टोरी बुक तैयार की थी जिसकी अंतराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी तारीफ की थी। उनकी इस किताब से प्रेरित होकर बैंगलोर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की टीम ने बुक पर आधारित एक म्यूजिकल वीडियो बनाया था जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया।

अमायरा- द एसेंस ऑफ़ लाइफ किताब से पहले स्वाति ने ‘ Without A Goodbye ‘ नाम की एक सच्ची सुसाइड की घटना पर आधारित नॉवेल लिखी थी जो भी काफी लोकप्रिय हुई।

Swati Kumari

कानपूर में जन्मी और पली-बढ़ी स्वाति पटना में अपने मामा-मामी के साथ पटना में रहती हैं। स्वाति का ननिहाल राजगीर में है और पैतृक गाँव पटना जिला में दनियावां का सलारपुर है।

कानपूर से अपनी स्कूल की पढाई करने के बाद पटना से ग्रेजुएशन और बैंगलोर से MBA किया जहाँ उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन पर फ्रांस के पो- यूनिवर्सिटी के बिज़नेस स्कूल  ESC-पो में स्टूडेंट एक्सचेंज के तहत चुनाव करके भेजा गया।

स्वाति कहती हैं, “मैं दुनिया के किसी भी कोने में रहूं, मैं एक भारतीय और बिहारी लड़की के रूप में पहचानी जाउंगी। मुझे खुद के बिहारी होने पर गर्व है। और मेरे काम से बिहार और भारत का नाम रोशन होता है तो इस से बढ़कर मेरे लिए ख़ुशी की और किया बात होगी!”

एक बिहारी सब पर भारी Swati Kumari को उनके मिशन के लिए शुभकामनाएं देता है और आशा करता है की वो अपने इस नेक मकसद में कामयाब हों।

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