एक ‘चिंतित बिहारी’ का खुला खत नीतीश कुमार के नाम

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3. छपरा के धर्मासती गंडामन गांव के स्कूल में तो दिल दहला देने वाला वह ‘कारनामा’ हुआ, जो आजाद हिन्दुस्तान के किसी भी स्कूल में नहीं हुआ था. आपका मिड-डे मील खाकर हमारे 23 बच्चे असमय काल के गाल में समा गए। ये ‘हादसा’ नहीं, ‘कारनामा’ था।

क्योंकि राज्य के स्कूलों में मिड-डे मील खाकर बार-बार बच्चों के बीमार होने की घटनाएं घट रही थीं और हम जैसे लोग बार-बार आपको आगाह कर रहे थे कि किसी भी दिन बड़ी घटना हो सकती है, लेकिन आपकी सरकार में गरीबों के बच्चों के एक वक्त के मिड-डे मील के ढाई-तीन रुपये तक के घोटालों को अंजाम देना नहीं छोड़ा गया।

“स्कूलों में गुरुजी खैनी खाकर बच्चों का भविष्य थूकते रहे और आप देश को साइकिल चलाती हुई लड़कियां दिखाकर सुशासन बाबू बन गए ।“
4. आपने शिक्षकों को शिक्षक नहीं बल्कि एक फ़ोर्थ ग्रेड का एम्प्लॉई बना दिया, आपके स्कूलों में गुरुजी खैनी खाकर बच्चों का भविष्य थूकते रहे और आप देश को साइकिल चलाती हुई लड़कियां दिखाकर सुशासन बाबू बन गए ।

5. जिन साइकिलों के सहारे आप सुशासन बाबू बने, उन साइकिलों में भी कम घोटाले नहीं हुए। जो छात्र आपके स्कूलों में नहीं पढ़ते थे, उनके नाम पर भी साइकिलें बांटी गईं। स्कूलों की साइकिलें दुकानों और अन्य लोगों को बेची गईं। अभिभावको ने बिना साइकिलें खरीदे साइकिल दुकानों से फर्जी पर्चियां बनवाकर भी सरकार से पैसे लिए गए। लेकिन आपने क्या किया ? बच्चों को लॉलिपॉप तो दिया लेकिन दिया क्यूँ ? किसलिए दिया ये शायद बताना भूल गए ।

6. पोशाक के पैसों के लिए आपने राज्य भर के बच्चों को भिखमंगा बना दिया, ये पैसे किसी को दिए, किसी को नहीं दिए, और वहाँ भी रिश्वत ख़ूब चली लोग 50-50 रुपये तक रिश्वत लेने से नही मुकरते, वितरण में भेदभाव भी हुआ।

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