विश्व प्रसिद्ध है मुंगेर का ancient yoga school, इंदिरा गाँधी और कलाम भी यहाँ सीख चुकें है योग

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योग दिवस के लिए देश भर में 3 लाख से अधिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि बिहार के मुंगेर जिले में एक ancient yoga school है।

जिसे पूरी दुनिया में योग नगरी के नाम से जाना जाता है। बिहार स्कूल ऑफ योग को दुनिया का पहला योग विश्वविद्यालय माना जाता है। बिहार स्कूल ऑफ योग की स्थापना स्वामी सत्यानंद ने सन् 1964 में मुंगेर के गंगा नदी के तट पर की थी।

आज यहां पूरी दुनिया के लोग बिना किसी भेदभाव के योग सीखते हैं। स्कूल के स्वामी ज्ञान भिक्षु सरस्वती ने बताया कि स्वामी सत्यानंद के गुरु स्वामी शिवानंद वर्ष 1937 में ऋषिकेश से मुंगेर आए थे।




उन्होंने जगह-जगह संकीर्तन के जरिए योग का संदेश दिया। इसके बाद उनके शिष्य सत्यानंद सरस्वती को मुंगेर में ही यह दिव्य संदेश प्राप्त हुआ कि योग भविष्य की संस्कृति है।





इसके तहत वर्ष 1964 में स्वामी शिवानंद के महासमाधि ले लेने के बाद स्वामी सत्यानंद ने मुंगेर में गंगा दर्शन आश्रम की नींव रखी और यहीं वह योग को आगे बढ़ाने में जुट गए।

स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने योग सिखाने के लिए 300 से ज्यादा पुस्तकें लिखीं, जिसमें योग के सिद्धांत कम और प्रयोग ज्यादा हैं।









ancient yoga school munger




वर्ष 2010 में सत्यानंद स्वामी के निधन के बाद इस स्कूल की जिम्मेदारी स्वामी निरंजनानंद के कंधों पर आ गई।

मुंगेर के इस ancient yoga school की योग में भूमिका को देखते हुए पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने वर्ष 2014 में मुंगेर को योगनगरी बताया था।

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योग के प्रचार-प्रसार के लिए इस स्कूल की प्रशंसा..

न्यूजीलैंड के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लिथ हालोस्की, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद तथा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व मोरारजी देसाई सहित योग गुरु बाबा रामदेव भी कर चुके हैं।













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