पीएमसीएच को विश्व का सबसे बड़ा अस्पताल बनाने के लिए अगले माह ग्लोबल टेंडर होगा। कैबिनेट ने तकनीकी विशेषज्ञता वाली एजेंसी की खोज के लिए टेंडर की शर्ताें में संशोधन की स्वीकृति दे दी है। अब समान प्रकृति के कार्य संबंधी एजेंसियां भी इस टेंडर में शामिल हो पाएंगी। इससे बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम (बीएमएसआईसीएल) को अगले महीने ग्लोबल टेंडर करने का रास्ता साफ हो गया है। 48 एकड़ (1.95 लाख वर्गमीटर) क्षेत्र में फैले इस अस्पताल के पुनर्विकास के लिए डीपीआर तैयार हाे चुकी है। सात साल में 5540 करोड़ की लागत से इसे अत्याधुनिक बनाने की योजना तैयार है। मरीजों की भर्ती के लिए 5462 बेड होंगे। फिलहाल 1754 बेड हैं। बेड कम हाेने से जमीन पर लिटाकर भी इलाज किया जाता है।

यहां आईसीयू-इमरजेंसी में 1170 बेड की व्यवस्था होगी। इमरजेंसी में एक साथ 500 बेडाें पर मरीजों का इलाज होगा। 670 बेड की आईसीयू बनेगी। भवनों को भूकंपरोधी बनाया जाएगा। मरीजों को पीएमसीएच पहुंचने में आसानी हो इसके लिए दो तरफ से प्रवेश द्वार बनाया जाएगा। लोकनायक गंगा पथ से इसे जोड़ा जा रहा है। अशोक राजपथ पर फ्लाईओवर बनाकर जामरहित रास्ता बनाया जाएगा। 3435 गाड़ियों की पार्किंग होगी। अलग से 1846 गाड़ियों की पार्किंग के लिए मल्टीलेवल कार पार्किंग बनेगी। परिजनों के लिए 450 बेड की धर्मशाला भी बनेगी।

इस सबसे बड़े अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। इनमें फायरप्रूफ व भूकंपरोधी अस्पताल, पावर सब-स्टेशन शामिल हैं। अस्पताल की बिल्डिंग पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन कलर की होगी। इसमें 3435 वाहनों की मल्टीलेवल पार्किंग सुविधा, मल-जल उपचार संयंत्र, प्रदूषण उपचार संयंत्र, मेडिकल गैस पाइप लाइन संयंत्र, नर्स कॉल सिस्टम, दवा-पैथोलॉजिकल सैंपल के लिए न्यूमेटिक ट्यूब सिस्टम, केंद्रीय स्टेराइल सर्विस डिपार्टमेंट, अपशिस्ट-लॉण्ड्री के लिए न्यूमेटिक सिस्टम होंगे।

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