दुनिया ने नीतीश कुमार का फिर माना लोहा, कहा- सोशल इंजीनियरिंग का बेजोड़ है फॉर्मूला

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। कुमार ने अपने मंत्रिमंडल में कुल 26 मंत्रियों को जगह दी और इस दौरान जातीय समीकरण का विशेष ध्यान रखा गया।महागठबंधन से अलग होने के बाद नीतीश कुमार पर सबसे बड़़ी चुनौती किसी जाति विशेष के पक्ष में खड़े नहीं होने की है और यही वजह रही कि उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में इसका पूरा ख्याल रखा।नीतीश मंत्रिमंडल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) कोटे से 11, जनता दल (यूनाइटेड) से 14 और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) से एक विधायक को जगह दी गई है।
नीतीश कैबिनेट में बिहार की अगड़ी जाति भूमिहार समुदाय से आने वाले 3 मंत्रियों को जगह दी गई है। वहीं तीन यादव और 2 ब्राह्मण को मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा कुशवाहा जाति के 3 लोगों को मंत्री बनाया है।
नीतीश कुमार ने हालांकि अपनी कैबिनेट में एनडीए के सहयोगी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी को जगह नहीं दी है। नीतीश कुमार और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के उपेंद्र कुशवाहा में खटपट जगजाहिर है। इसी कारण उन्होंने कुशवाहा समुदाय के 3 विधायकों को मंत्री बनाया है। उपेंद्र कुशवाहा इस समुदाय को अपना मजबूत वोट बैंक बताते रहे हैं।
इसके अलावा कुर्मी जाति से 2, पासवान समुदाय से 2, धानुक जाति के 2 तथा दो राजपूतों को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। मंत्रिमंडल में एक दलित, दो मुसहर, एक बिंद, एक बनिया, एक मल्लाह और एक कहार जाति के विधायक को जगह दी गई है। नीतीश मंत्रिमंडल में एक मुस्लिम को भी मंत्री बनाया गया है। नंदकिशोर यादव ( यादव), प्रेम कुमार (बनिया), रामनारायण मंडल (कुर्मी), मंगल पांडेय (ब्राह्मण), विनोद नारायण झा (ब्राह्मण), सुरेश शर्मा (भूमिहार), कृष्ण कुमार ऋषि (मुसहर), विनोद कुशवाहा (कुशवाहा), राणा रणधीर (राजपूत), विजय सिन्हा (भूमिहार), प्रमोद कुमार (बनिया) और ब्रज किशोर बिंद (बिंद) को बीजेपी कोटे से मंत्री बनाया गया है।
बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष मंगल पांडेय को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना था, लेकिन उनके पटना में नहीं रहने के कारण वे शपथ नहीं ले सके।

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