जब छठ पूजा की छुट्टी रद्द किये जाने पर असम में गिर गयी थी प्रफुल्ल सरकार

आस्था

पटना: छठ पर्व महान आस्था का लोकपर्व है। बिहार के लोगों की इस पर्व के प्रति अटूट आस्था है। अगर कोई छठ व्रती की श्रद्धा में बाधा डालता है तो उसे कोप का भाजन होना पड़ता है। असम राज्य में बिहारी लोगों की बहुत बड़ी संख्या है। वे ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर बहुत धूमधाम से छठ पूजा करते हैं। लोगों की आस्था को ध्यान में रख कर असम सरकार ने छठ पर्व पर आधा दिन की छुट्टी घोषित कर रखी थी। लेकिन 1996 में जब प्रफुल्ल कुमार मोहंत दूसरी बार मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने ये आधा दिन की छुट्टी खत्म कर दी। असम में बिहारी मतदाताओं की संख्या निर्णायक है। बिहारी लोग छुट्टी खत्म किये जाने से बहुत नाराज हो गये। 2001 में जब चुनाव हुए तो प्रफुल्ल सरकार की हार की ये एक बड़ी वजह बन गयी।

2001 के असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने छठ की छुट्टी को बड़ा मुद्दा बना लिया। कांग्रेस ने इस बात का खूब प्रचार किया कि प्रफुल्ल सरकार ने छठ व्रतियों की आस्था पर चोट पहुंचायी है। अगर चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिला तो वह छठ पर्व पर पूरे एक दिन का अवकाश देगी। असम में बिहारी लोगों से प्रेरित होकर असमी और बंगाली लोग भी छठ पूजा करने लगे थे। कांग्रेस के इस मुद्दे ने लोगों के दिलों को छू लिया। एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर को काम कर ही रहा था, छठ की छुट्टी के मुद्दे ने भी प्रफुल्ल सरकार का बेड़ा गर्क कर दिया।

2001 के चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिला तो तरूण गोगई मुख्यमंत्री बने। कांग्रेस ने अपना चुनावी वाद पूरा किया। गोगई सरकार ने छठ पर एक दिन की छुट्टी घोषित कर दी। इतना ही नहीं गोगई सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर छठ पूजा करने के लिए घाट भी विकसित किये। यहां का कासोमारी घाट, बेटकुची घाट, पांडु घाट, नूनमाटी घाट छठ पूजा के लिए मशहूर हो चुका है।

छठ आने के पहले ही तत्कालीन मुख्यमंत्री तरूण गोगई खुद अफसरों के साथ इन छठ घाटों का निरीक्षण करते। गोगई सरकार ने व्रतियों के लिए कई सुविधाएं बहाल की। सरकार की इस पहल से लोग बहुत खुश हुए। कांग्रेस को इसका राजनीतिक फायदा मिला और वह 15 साल तक सत्ता में रही। इस साल भी सर्वानंद सोनोवाल की भाजपा सरकार ने छठ घाटों पर पूजा के लिए सभी सुविधाएं बहाल की हैं। गुवाहाटी शहर से ब्रह्मपुत्र नदी करीब पांच किलोमीटर दूर है। यहां के छठ घाटों पर लाखों की भीड़ उमड़ती है। नदी का तट बहुत फैला हुआ है। एक अनुमान के मुताबिक करीब पांच लाख लोग यहां छठ करने आते हैं।

इसके अलाव गुवाहाटी के पास प्रसिद्ध वशिष्ठ आश्रम है। यहां एक झरना है। पानी का प्रवाह एक छोटी नदी का रूप ले लेता है। इस स्थान पर भी बहुत बड़ी संख्या में छठ व्रती जुटते हैं। अब छठ की लोकप्रियता असमी और बंगाली समुदाय तक पहुंच गयी है। असमी और बंगाली समुदाय के लोग छठी मईया की पूजा करने में बिहारी लोगों से पीछे नहीं हैं। अब बिहार का महान पर्व भाषा और भूगोल की सीमा के पार पहुंच गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.