शाबाश डीएम साहिबा! गांव की महिलाओं को काम भी दिया और दाम भी…गांव से दूर हुई गरीबी

कही-सुनी

पटना: जशपुर (छत्तीसगढ़) की डीएम डॉ. प्रियंका शुक्ला ने गांव की महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता देने का बीड़ा उठाया है। जशपुर में जश-फ्रेश नाम से शुरू हुए प्रोजेक्ट ने कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। इस प्रोजेक्ट से डीएम प्रियंका शुक्ला ने ‘एक पंथ, दो काज’ के उद्देश्य को साधने की कोशिश की है।

स्वयं सहायता समूहों में काम कर रही महिलाएं सब्जियां उगाती हैं, जो सरकारी स्कूलों के मिड डे मील के लिए भेजी जाती हैं। ये सब्जियां ऑर्गनिक तरीके से उगाई जाती हैं। जिससे आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को सेहतमंद भोजन मिलता है। जश-फ्रेश ने प्रशासन का सहयोग से कुछ ही समय में आस-पास के क्षेत्रों में अपनी एक ब्रांड इमेज बना ली है और आगे इसे पूरे जिले में विस्तार करने पर काम चल रहा है, ताकि पूरे जिले को इसका फायदा मिल सके।

दुलदुला और कांसाबेल ब्लॉक में 25 महिलाएं अब तक इस प्रोजेक्ट से जुड़ चुकी हैं। रोज लगभग ढाई कुंतल सब्जियां उगाई जाती हैं, जिसकी वजह से इन स्वयं सहायता समूहों को 8-10 हजार रुपए प्रतिदिन कमाई हो जाती है। मिड डे मील में रोजाना आने वाली शिकायतों का ऐसा उपाय सराहनीय कदम माना जा रहा है। जशपुर के लोग इसकी सफलता का पूरा श्रेया अपनी डीएम साहिबा को देते हैं।

2009 बैच की आईएएस अफसर डॉ. प्रियंका शुक्ला इससे पहले भी अपने काम के लिए कई बार सम्मानित हो चुकी हैं। डॉ. प्रियंका शुक्ला ने एमबीबीएस लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) से किया है। प्रियंका बचपन से आईएएस अफसर बनना चाहती थी, पर डॉक्टरी की पढ़ाई में व्यस्त होने के बाद ये बात मन में कहीं दब गयी।

डॉ. प्रियंका बताती हैं कि अपनी इंटर्नशिप के दौरान गाँव का दौरा करते वक़्त जब एक महिला को उन्होंने गन्दा पानी पीने से रोका, तब वह उनसे बहस करने लगी। उसने कहा, “मैं क्यों आपकी बात सुनूं, आप कहीं की डीएम नहीं हैं”। इस वाकये के बाद ही उन्होंने फैसला किया कि वह अब वही बनेगी, जिसकी बात ये लोग सुनते हैं। अपनी इंटर्नशिप खत्म करते ही प्रियंका अपनी सिविल सर्विसेस की तैयारी में जुट गयीं और अपने तीसरे अटेम्प्ट में सफलता पा ली।

Source: Live News

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