हम सब! समूचे प्रांत के लोग! जो एक दूसरे को एक शक्ति की भांति समझते है!

ये उनकी सबसे बड़ी गलती कहूँ या फिर मेरे राज्य पर एक अभिशाप?

कुछ समझ नहीं आता! आखिर ऐसा क्यूँ?

भारत तो एक ऐसा देश है जिसकी अखंडता और एकता का परचम

समूचे विश्व मे लहराता है! जिसकी संस्कृति और सभ्यता का

कोई जोड़ नहीं है! देश मे “अतिथि देवो भव:” का नारा दिया गया है!

जिसका अर्थ है की हर वो व्यक्ति! जो हमारे घर या हमारे देश या हमारे प्रांत मे आता है!

वो अतिथि है और वो देव के समान है!

लेकिन यहा ये कहना गलत नहीं होगा की मेरी मिट्टी और मेरा प्रांत

मेरा बिहार और मेरे बिहरवासियों का हर राज्य मे शोषण होता रहा है!

वो देश की सबसे ज्यादा कोरपोरेटिव शहर मुंबई (महाराष्ट्र) हो या

प्रधानमंत्री जी का घर कहा जाने वाला राज्य गुजरात हो!

हर बार! हर बार! हम सब मिल कर कुछ पंक्तिया निंदा के रूप मे समर्पित करते है!

और फिर कुछ दिनो बाद वही सबकुछ दोहराया है!

वही दर्द! और वही पीड़ा कुछ हजार बिहारी भाइयो के चेहरे पर देखा जाता है!

और ये नयी बात नहीं है!

इतिहास गवाह है की हर कुछ दिन मे ये सारी घटनाए खुद को दोहराती है!

मैंने अपनी आत्मा की गहराई मे झांक कर इस प्रश्न का उत्तर खोजने की कोशीशे की

तो मुझे मालूमात हुआ की

ये सब कुछ शायद इस वजह से है क्यूंकी हम बिहारी लोग अपने धैर्य का परिचय बखूबी देते है!

हम आपने ऊपर हो रहे अत्याचारो का बदला लेने की कोशिस नहीं करते क्यूंकी हम उन जैसे नहीं है!

हमारी संस्कृति,हमारी सभ्यता और हमारी भाषा औरों से ज्यादा मिठास भरी है!

हम औरों के मुक़ाबले ज्यादा होशियार,ज्यादा मेहनती और ज्यादा पढ़ाकू होते है!

शायद उन्हे ये सारी चीजे और हमारी मस्तमौला हरकते उन्हे जलन की उस भट्ठी मे झोंक देती है

जहा से उनकी सोचने और समझने की शक्ति जल कर खांक हो जाती है

और उस खांक के शिकार बनते है हम बिहारी!

बिहारी चीप होते है! बिहारियों की अंग्रेजी अच्छी नहीं! बिहारी अंग्रेजी गाने नहीं सुन सकते और बिहारी सलीके से बात नहीं कर सकते!

किसी किसी के जुबान मे बिहारी बदतमीज भी होते है!

जरा गौर फरमाइएगा ये उनकी जुबान है जो हर रात अपनी तमीज़ और अपने परिवार की इज्जत नीलाम कर के आते है!

उनके लिए उनकी तमीज़ महंगा फोन, लड़की, सोश्ल मीडिया पर अपडेट एवं शराब की बॉटल है!

जिनके भाषा मे माँ बहन की इज्जत सरेयाम नीलाम होती हो वो लोग भी हमारे तमीज और हमारी सभ्यता का आकलन कर देते है!

जिनकी बोली मे तनिक भी मिठास न हो वो भी हमारे भाषा और हमारी टोन का आकलन कर देते है!

अरे आखिर ऐसा क्यू?? बस इसलिए की यव सब जिल्लतें हम बिहार के लोग बर्दाश्त कर लेते है!

और अपने काम मे माग्न हो जाते है!

या फिर इसलिए की हमारी साक्षारता दर कम होने के बाद भी हम देश को सबसे ज्यादा IAS\IPS देते है!

अरे भाई! देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जो की बिहार के सपूत थे!

और चाणक्य,अशोका के साथ साथ एशिया की पहली यूनिवरसिटि नालंदा जिसमे से 6 महीने तक किताबों के जलने की पलटे उठी थी

ये सारी चीजे दी फिर भी हम जंगली और बेवकूफ?

नहीं! मुझे ये जानना है!

और मै ये जान कर रहूँगा की आखिर ये कब तक चलेगा?

और आखिर तमाम देशवालों को बिहार से इतनी नफरत क्यू है?

क्यू हर बार हर एक बिहारी को मजबूर कर दिया जाता है की वो अपना औकात दिखा के औरों का बंटाढार कर दे!

राजनीति हो! खेल-कूद हो सिनेमा हो,सरकारी सेवाए हो,विदेशी सेवाए हो या कोई भी काम!

उनमे से शायद ही कुछ बच जाता होगा जिसमे बिहारी अव्वल नहीं हो!

फिर भी इतनी घटिया मानसिकता क्यू?

क्यूँ हर मोड पर एक बिहारी को गाली के रूप में देखा जाता है ?

आज के जमाने में जहां देश के हर वर्ग के लोग खुद को तकनीक से जोड़ रहें है! वहाँ बस एक राज्य के लिए लोगों के दिलो में इतनी नफरत क्या अच्छी लगती है ? जब बलकोनि में बैठ के चाय की चुस्की ले रहे होंगे न! तब खुद से पूछिएगा की भारत के कुल राज्यो में एक बिहार हि है जो आज लोगो के निशाने पर है! आपलोगों को लगता होगा की आपलोगों के जहर भरे शब्दों का हमपर असर पड़ेगा और हम लोग अपने लक्ष्य से भटक जाएंगे तो आपलोगों की सबसे बड़ी गलत फहमी है! बल्कि हमलोग ई सोचते है की :-“की बक्क ससुर सही चाहे गलत अपना टाइम तो मेरे बारे में सोच के खराब कर रहा है न! साला ओतन देर में दो गो सवाल पढ़ लेंगे”

हम सब बिहारी हैं भैया!

हड्डी तोड़ देंगे! और दिल टूटने पर UPSC का रेकॉर्ड तोड़ देंगे!

लेकिन किसी का घर या किसी का दिल नहीं तोड़ेंगे!

जय बिहार! जय बिहार की धरती!


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