वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में नेपाल से आए हाथियों का तांडव, साइनबोर्ड तोड़े; रिहायशी इलाके में दहशत

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बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में नेपाल के चितवन जंगल से भटककर आए करीब आधा दर्जन हाथियों का झुंड तांडव मचा रहा है। हाथियों ने वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में लगे कई साइनबोर्ड और अन्य चीजों को क्षतिग्रस्त कर दिया। हाथियों के तांडव से वाल्मीकि नगर और गनौली के जंगली एवं रिहायशी इलाकों में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोग डरे हुए हैं। वीटीआर प्रशासन नेपाली हाथियों की निगरानी में जुटा है।

वाल्मीकिनगर के प्रभारी वनक्षेत्र अधिकारी रोबिन आनंद ने बताया कि नेपाल के चितवन जंगल से वीटीआर के जंगल में आधा दर्जन हाथियों का भटकने व उत्पात मचाने की सूचना मिली। इस सूचना को गंभीरता से लेते हुए वनकर्मियों की टीम के साथ हाथियों की निगरानी के लिए पेट्रोलिंग की गई और पगमार्क खोजे गए। फिलहाल हाथियों का पता नहीं चला है। उन्होंने बताया कि पेट्रोलिंग के दौरान वीटीआर का साईनबोर्ड क्षतिग्रस्त हालात में पाया गया है। हो सकता है शरारती तत्वों या किसी अन्य जंगली जानवर ने उन्हें तोड़ दिया।

रोबिन आनंद ने बताया कि नेपाल का चितवन जंगल और वीटीआर का जंगल आपस में जुड़ा हुआ है। ऐसे में वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व में नेपाल से गैंडे, बाघ और हाथियों समेत अन्य जंगली जानवरों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में हाथियों का आने की बात को नकारा नहीं जा सकता है। फिलहाल जबतक कोई हाथियों का पगमार्क या कोई अन्य ठोस सबूत नहीं मिलता, तब तक इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है।

वाल्मीकि नगर वनक्षेत्र में रखे गए चार हाथियों से वनकर्मी निगरानी कर रहे हैं। जंगल में हाईअलर्ट जारी करके चौकसी बढ़ा दी गई है और संभावित नेपाल से भटके गए हाथियों की तलाश की जा रही है।

वीटीआर में हाथियों के उत्पात से 10 साल में हो चुकी है कई मौतें

नेपाली  हाथियों के वीटीआर मे तांडव मचाने से प्रशासन समेत लोगों की व्यापक क्षति उठानी पड़ती है। विभागीय आकड़ों पर नजर डालें तो हाथियों के तांडव से क्षेत्र में पिछले कुछ सालों में कई घरों को नुकसान पहुंच चुका है और कुछ लोगों की मौत भी हुई है। 2013-14 में हाथियों ने उत्पात मचाकर 23 घर तोड़े और 4 लोगों की जान चली गई। 2015-16 में 2 लोगों की मौत हुई। इसके अलावा कई घरों को भी नुकसान पहुंचा।

 

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