व्यस्कों को ही नहीं छोटे बच्चों को भी होती है स्लीप डिसऑर्डर की समस्या, ये हैं लक्षण और उपाय

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आपने आजतक व्यस्कों के बीच स्लीप डिसऑर्डर के कई किस्से सुने होंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं अनिद्रा की समस्या सिर्फ बड़े लोगों को ही नहीं बल्कि बच्चों को भी परेशान करती है। बच्चों में नींद न आने की समस्या 6 महीने से किशोरावस्था तक हो सकती है। हालांकि बच्चों में इस समस्या का पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन नींद न आने की वजह से चिड़चिड़ापन, गुस्सा आना, खाना ठीक से न खाना, पेट संबंधित समस्याएं, सुस्ती जैसी प्रॉब्लम बच्चों के बीच आम हो जाती है। आइए जानते हैं बच्चों में स्लीप डिसऑर्डर होने पर दिखाई देते हैं कौन से लक्षण और क्या है इससे बचाव के उपाय।

बच्चों में स्लीप डिसऑर्डर होने पर दिखाई देते हैं ये लक्षण – 


-देर रात सोना और सुबह जल्दी उठ जाना।
-रात में बार-बार नींद से जगाना और फिर दोबारा सोने में परेशानी महसूस करना। दिन के समय में 10 से 15 मिनट की कई झपकियां लेना।
-खेलने-कूदने की जगह शांत बैठे रहना। नियमित तौर पर खाने की खुराक का कम होना।
-हर समय सुस्ती महसूस होना।
-छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना और चिड़चिड़ापन महसूस होना।

बच्चों को नींद न आने का कारण – 


-कई बार नींद न आने की समस्या बुरे सपने के कारण हो सकती है। इससे बचने के लिए सोने से पहले या पूरा दिन आपका बच्चा मोबाइल और टीवी पर क्या देख रहा है इस पर ध्यान दें।
-कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक जैसी चीजों में कैफीन की मात्रा बहुत ज्यादा पाई जाती है। अगर छोटा बच्चा इसका सेवन करता है तो नींद न आने की समस्या हो सकती है।
-कई बार आसपास के वातावरण गर्मी या सर्दी के कारण भी बच्चों को नींद न आने की समस्या हो सकती है। बच्चों को सुलाते वक्त ध्यान दें कि आसपास बिल्कुल शांत माहौल हो। जिस कमरे में बच्चा सो रहा है वहां का तापमान सामान्य हों।
-दवाइयों के हैवी डोज के कारण भी नींद न आने की समस्या हो सकती है।

 

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