Vishhari

Vishhari Devi: बिहार में यहां है 100 साल पुराना नागों का मंदिर, जहां सांप काटने वालों को मिलता है नया जीवन

आस्था

मिथिला क्षेत्र में बिहुला- Vishhari की पूजा हर घर में होती है और यहां के तमाम स्थानों पर विषहरी देवी के मंदिर काफी संख्या में देखने को मिलते हैं। ऐसा ही एक मंदिर बिहार के मधेपुरा जिले के आनंदपुरा नामक गांव में भी है, जो कई सौ वर्ष पुराना बताया जाता है।

कौन हैं Vishhari देवी ?

Vishhari यानी विष को हरने वाली देवी। श्रवण मास में भगवान शिव की तरह सर्प की देवी की पूजा भी की जाती है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-106 से सटे आनंदपुरा के इस मंदिर में दो मूर्तियां हैं, जो हजारों साल पुरानी हैं। एक मूर्ति देवी Vishhari की है, जबकि मान्यता है कि दूसरी मूर्ति देवी सरस्वती की है, क्योंकि उनके हाथ में वीणा है।

हालांकि स्थानीय लोगों का मानना है कि दूसरी मूर्ति विषहरी देवी की पांच बहनों में से एक की है। पुराणों के मुताबिक, शिव की मानस पुत्री Vishhari पांच बहनों में सबसे बड़ी हैं। उनके बाद मैना, दिति, जया और पद्मा हैं। भगवान शिव की जटा से इनका जन्म होने के कारण इन पांचों देवियों को शिव की मानस कन्या माना गया और मनसा नाम रखा गया।




इस मंदिर में इन दो मूर्तियों के अलावा और भी कई प्राचीन मूर्तियां हैं, जिनकी पूजा की जाती हैं। इस भगवती स्थान के पास ही एक गहरा कुआं भी है, जिसके पानी को लेकर कई मान्यताएं हैं। पास ही, एक गहरा तालाब और शिव का मंदिर भी है। यहां पूरे साल मान्यता मांगने और उन्हें उतारने का सिलसिला चलता रहता है।

इसके अलावा, अखंड रामायण, अष्टजाम और भगैत की पूजा भी होती है। यह मंदिर अभी भी जंगल से घिरा हुआ है और कहा जाता है कि यहां परिसर में मौजूद इमली और वटवृक्ष में सांपों का निवास है, जिन्होंने आज तक किसी को हानि नहीं पहुंचाई है। आने वाले श्रद्धाल उन्हें दूध अर्पण करते हैं। अक्सर सर्प यहां पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं से सटकर चुपचाप बैठ जाते हैं और कथा ‘सुनते’ हैं।




यहां आने वाले लोग न तो किसी सांप को छेड़ते हैं और न ही सांप उन्हें हानि पहुंचाते हैं। मान्यता है कि विषहरी स्थान का इलाका काफी सिद्ध क्षेत्र है और अगर यहां आने वाले किसी व्यक्ति को गलती से कोई सांप काट ले तो उसे विष नहीं लगता है। हालांकि इस मंदिर और मूर्तियों के बारे में कहीं कोई लिखित प्रमाण नहीं मिलता।

हर वर्ष यहां नागपंचमी के मौके पर काफी बड़े स्तर पर पूजा-पाठ किया जाता है और मेला भी लगता है। इस मौके पर यहां आने वाले श्रद्धालु धान के लावे और दूध से देवी Vishhari का पूजन करते हैं। झांप (माली द्वारा तैयार मंदिरनुमा आकृति) भी देवी विषहरी को अर्पित की जाती है।




मान्यता है कि जो लोग विषहरी देवी को यह कलाकृति चढ़ाते हैं, उन्हें सदा के लिए सर्पदंश से मुक्ति मिल जाती है। यहां पहुंचने के लिए बिहार की राजधानी पटना से रेलमार्ग या बस द्वारा पहले सहरसा जाना पड़ता है।

फिर सहरसा से किशुनगंज, बिहारीगंज, आलमनगर, चौसा या भागलपुर जाने वाली किसी भी बस से उदा उतरना होगा। यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन बिहारीगंज और दौराम मधेपुरा है।




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