कहां-कहां चूक गई विराट कोहली की टीम ?

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दिल्ली डेयरडेविल्स के बाद रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर इस सीजन में प्लेऑफ की रेस से बाहर होने वाली दूसरी टीम हो गई. शनिवार को राजस्थान रॉयल्स ने बैंगलोर को 30 रनों के बड़े अंतर से हराया. वो भी तब जबकि विराट कोहली की टीम को सिर्फ 165 रनों के लक्ष्य का सामना करना था.

विराट कोहली के विकेट को छोड़ दिया जाए तो एक वक्त पर 8.3 ओवर में आऱसीबी ने 1 विकेट पर 75 रन बना लिए थे. इसी स्कोर पर पार्थिव पटेल आउट हुए. इसके बाद एबी डीविलियर्स को छोड़कर पूरा का पूरा मिडिल ऑर्डर फ्लॉप साबित हुआ. 35 गेंद पर 53 रन की एबी डीविलियर्स की पारी बेकार चली गई.

पिछले सीजन में भी बैंगलोर की टीम का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था. उसने 8वीं पायदान पर टूर्नामेंट में फिनिश किया था. रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर उन चंद टीमों में से एक है जिसके खाते में अभी तक आईपीएल का खिताब एक बार भी नहीं आया है. इस सीजन में टीम के प्रदर्शन को देखकर लगता है कि अभी ये इंतजार और लंबा चलेगा. आखिर क्या वजह है कि विराट कोहली की टीम आईपीएल में बार बार पटरी से उतर जाती है? इस बात का जवाब बड़ा सीधा है, खेल के दो प्रमुख डिपार्टमेंट यानी बल्लेबाजी और गेंदबाजी में आरसीबी की टीम अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी.

एबी डीविलियर्स पर जरूरत से ज्यादा भरोसा

इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता है कि एबी डीविलियर्स और विराट कोहली इस समय दुनिया के दो सबसे बेहतरीन बल्लेबाज हैं. दोनों ही खिलाड़ी आक्रामक हैं. आईपीएल में ये दोनों इसलिए और भी ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं क्योंकि इनके पास शॉट्स में वेराइटी बहुत है. एबी डीविलियर्स को 360 डिग्री वाला बल्लेबाज भी इसीलिए कहा जाता है क्योंकि वो मैदान के किसी भी हिस्से में स्ट्रोक खेल सकते हैं. बैंगलोर की नाकामी की एक बड़ी वजह यही रही कि पूरी टीम की बल्लेबाजी सिर्फ इन्हीं दो बल्लेबाजों के इर्द गिर्द घूमती रही.

शनिवार की हार के बाद विराट कोहली ने स्वीकार भी किया कि सिर्फ एबी डीविलियर्स पर जरूरत से ज्यादा दबाव का होना उन्हें भारी पड़ा. एबी डीविलियर्स इस सीजन में बीच के दो लीग मैच खेल भी नहीं पाए थे. इस तरह उन्होंने इस सीजन में 12 मैच खेले. इन दोनों बल्लेबाजों पर टीम की निर्भरता को इस तरह भी समझा जा सकता है कि इन दोनों के अलावा बतौर बल्लेबाज सिर्फ मनदीप सिंह ही हैं जिन्हें सभी 14 मैचों में प्लेइंग-11 में मौका मिला.

मनदीप सिंह 14 मैचों में 252 रन ही बना पाए. इसके अलावा बल्लेबाज प्लेइंग 11 से अंदर बाहर होते रहे. टीम की नाकामी की एक बड़ी वजह यही रही कि बल्लेबाजों की ‘कोर’ टीम विराट कोहली तैयार ही नहीं कर पाए. विराट कोहली के 14 मैचों में 530 और एबी डीविलियर्स के 12 मैचों में 480 रनों को छोड़ दिया जाए तो बाकी बल्लेबाज पूरे सीजन में 200 रनों के आंकड़े के इर्द गिर्द रहे. ज्यादातर बल्लेबाजों की औसत 30 से कम की रही. जो ये दिखाता है कि बैंगलोर की टीम बल्लेबाजी में ‘स्टेबल’ नहीं रही.

गेंदबाजी में भी बेहतर नहीं थे हालात

बल्लेबाजों के साथ साथ गेंदबाजी में भी आरसीबी की हालत पतली ही थी. उमेश यादव को छोड़ दिया जाए तो किसी भी गेंदबाज ने प्रभावित नहीं किया. उमेश यादव ने 14 मैच में 20 विकेट लिए. वो इस सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की फेहरिस्त में दूसरे नंबर पर हैं. उमेश यादव के अलावा विराट कोहली ने मोहम्मद सिराज की तारीख जरूर की, लेकिन मोहम्मद सिराज की गेंदबाजी के आंकड़े औसत ही रहे. उन्होंने 11 मैच में 11 विकेट लिए. उनका इकॉनमी रेट भी 8.95 का रहा.

विराट कोहली के ट्रंप कार्ड यजुवेंद्र चहल भी औसत प्रदर्शन ही कर पाए. उन्हें विराट कोहली ने सभी लीग मैचों में मौका दिया, लेकिन कप्तान जिस तरह के प्रदर्शन की उम्मीद उनसे लगाए बैठे थे वो उस पर खरे नहीं उतरे. चहल ने 14 मैच में 12 विकेट लिए. सीजन के टॉप 10 कामयाब गेंदबाजों में उमेश यादव को छोड़कर एक भी गेंदबाज आरसीबी का नहीं है. इन आंकड़ों में ही विराट कोहली की टीम की नाकामी का राज और सबक दोनों छुपा हुआ है.

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