ग्रामीणों ने DIG-DM-SP को रात भर बांधकर रखा, गांव के बाहर बनाया बंधक

खबरें बिहार की

खूंटी से करीब बीस किलोमीटर दूर कांकी-सिलादोन गांव के पास गुरुवार शाम से ही ग्रामीणों ने एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा, डीएसपी रणवीर सिंह, एसडीओ प्रणव पाल, कार्यपालक दंडाधिकारी रविन्द्र गगराय, एएसपी अनुराग राज, सीआरपीएफ के कमांडेंट पंकज कुमार, तोरपा के एसडीपीओ नाजिर अख्तर, मुरहू, तोरपा, कर्रा और खूंटी के थानेदार समेत कई मजिस्ट्रेटों और लगभग 150 पुलिस अफसरों और जवानों को घेर लिया।

ग्रामीण हजारों की संख्या में पारंपरिक हथियारों से लैस थे। इस सूचना पर गांव पहुंचे डीआईजी और डीएम को भी मौके पर नहीं आने दिया गया क्योंकि ग्रामीणों ने रास्ता काट दिया था। रात भर डीआईजी रोड पर ही रहे। उसके बाद जब मौके पर पहुंचे तो ग्रामीणों ने इन्हें भी घेर लिया।

ग्रामीणों ने इन सभी ऑफिसर्स को शुक्रवार की सुबह तक घेरे रखा। ग्रामीणों के आगे सारे ऑफिसर्स लाचार नजर आए। सभी ऑफिसर्स को ग्रामीणों ने जमीन पर बिठाकर घेरे रखा। बड़ी मुश्किल से लोगों को समझाया गया तब जाकर ऑफिसर्स की जान बची।









यह सूचना पाकर डीजीपी डीके पांडेय भी अल सुबह खूंटी पहुंचे। उन्होंने भी ग्रामीणों से बात की। झारखंड में सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन सरकार ने वापस ले लिया है, मगर इसके विरोध में कई महीनों से ग्रामीणों ने बैरियर लगाकर अफसरों और बाहरी लोगों की एंट्री बंद कर रखी है।

गुरुवार को एसडीपीओ रणवीर सिंह पुलिस लेकर सोदाग, रंगदाग और सुल्हे में बैरियर हटाने गए। सिलादोन के पास काकी गांव में ग्रामीणों ने इन्हें रोक लिया। ग्रामीणों की संख्या बढ़ने लगी तो पुलिस ने हवा में गोलियां चलाईं। इससे मामला और बिगड़ गया। शाम सात बजे खूंटी थाने को सूचना मिली।









नौ बजे जिला पुलिस, कोबरा, सीआरपीएफ के जवान वहां पहुंचे। एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा रात दस बजे पहुंचे, तो उन्हें भी बंधक बना लिया। फिर रांची से रैफ और अतिरिक्त फोर्स वहां भेजी गई। रास्ते बंद कर दिए जाने से ये खूंटी से आगे नहीं बढ़ पाए।

रात दो बजे तक ढाई हजार से ज्यादा लोगों ने कांकी में अफसरों और जवानों को घेर रखा। खूंटी से बातचीत के लिए भेजे दो मजिस्ट्रेट, सीओ, सीआई और एसडीओ प्रणव पाल को भी घेर लिया गया था। रात एक बजे रांची से डीआईजी अमोल वी होमकर और एसपी ग्रामीण राजकुमार लकड़ा खूंटी पहुंचे। वे भी खूंटी से आगे नहीं जा सके।








डीआईजी होमकर ने बताया कि खूंटी पुलिस देर शाम जब बैरियर हटाकर लौट रही थी तो गांव वालों ने इन्हें रोका, इस पर विवाद हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि उनसे पूछे बिना कोई बाहरी आदमी अंदर नहीं आ सकता है।

मौके पर रांची के एसपी ग्रामीण राजकुमार लकड़ा, खूंटी डीएम मनीष रंजन, एसटीएफ के एसपी अनुरंजन किस्पोट्‌टा समेत कई ऑफिसर्स शुक्रवार की सुबह मुक्त हुए।



Leave a Reply

Your email address will not be published.