आज है वट पूर्णिमा और गुरुवार का ख़ास संयोग, सर्वार्थसिद्धि योग में ऐसा करने से मिलेगा सौभाग्य

आस्था

इस बार ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि गुरुवार के दिन पड़ रही है। आज के दिन पितरों की पूजा का विधान है। इससे पितृ तृप्त होते हैं। इसके साथ ही आज के दिन ज्येष्ठ पूर्णिमा पर वट पूर्णिमा व्रत से अखंड सौभाग्य होने एवं पति की लंबी उम्र प्राप्त होने की मान्यता है। माना जाता है कि पूर्णिमा के दिन इस व्रत का वर्णन स्कंद पुराण में भी है। सुहागिन महिलायें अपने पति की लंबी उम्र होने के लिए इस दिन वट पूर्णिमा व्रत रख पूजा करती हैं।

वट पूर्णिमा व्रत का ये पर्व विशेष तौर पर गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा समेत दक्षिण भारत में मनाया जाता है। ये पर्व उत्तर भारत में मनाये जाने वाले वट सावित्री व्रत की तरह ही मनाया जाता है। जहां उत्तर भारत में मनाये जाने वाला वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या को किया जाता है, वहीँ वट पूर्णिमा व्रत ज्येष्ठ की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत रखने सुहागिन महिलाओं अपने अखंड सौभाग्यवती होने का फल प्राप्त करने के लिए तथा घर में सुख,शांति और पति की लंबी उम्र के लिए करती हैं।

इस साल वट पूर्णिमा व्रत आज 24 जून 2021 दिन गुरुवार को मनाया जा रहा है। इसी दिन ज्येष्ठ पूर्णिमा और कबीर दास जी की जयंती भी है।

वट सावित्री व्रत की तरह वट पूर्णिमा के दिन भी सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्यवती होने और पति की लंबी आयु होने के लिए उपवास रखती हैं और फिर पूजा करके सत्यवान- सावित्री की कथा सुनती हैं।

क्या है वट पूजा कथा ?

कथा के अनुसार, अश्वपति नाम के राजा की पुत्री सावित्री थी। सावित्री के विवाह के समय नारद जी ने सत्यवान के अल्पायु होने की भविष्यवाणी की थी। इसके जानने के बाद भी सावित्री ने अल्प आयु सत्यवान से ही विवाह किया। विवाह के एक वर्ष के बाद एक दिन सत्यवान लकड़ी काटते-काटते थक गया और वह बरगद के पेड़ की नीचे सोने लगा। नींद से न जागने पर सावित्री को नारद जी की भविष्यवाणी याद आयी। यमराज को सत्यवान का प्राण ले जाते देखकर सावित्री ने यमराज को स्वयं 100 पुत्रों की मां होने के वरदान की याद दिलाई। तब यमराज ने सावित्री के तप और सतीत्व को देख कर सत्यवान के प्राण लौटा दिए। यमराज के प्राण लौटते ही सत्यवान जीवित हो गए। यह घटना बरगद के पेड़ के नीचे हुई थी। इसी कारण से इस दिन को वट सावित्री या वट पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं।

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