बिहार के गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की गई. इसके साथ ही उनके परिवार और चाहने वालों के बीच खुशी की लहर है. लेकिन परिवार को एक कसक भी है. सिंह के छोटे भाई राम अयोध्या सिंह का कहना है कि मेरे भाई को पद्म श्री दिया गया, इस बात का संतोष तो है लेकिन वे भारत रत्न के हकदार हैं. वहीं उनके भतीजे ने कहा कि जब वशिष्ठ बाबू को भारत रत्न से नवाजा जाएगा, तभी उनकी आत्मा को शांति मिलेगी.



छोटे भाई के साथ ही बिताया अंतिम समय
सिंह के छोटे भाई राम अयोध्या सिंह सेना से सेवानिवृत्त हुए हैं. उन्होंने कई सालों तक वशिष्ठ नारायण सिंह को अपने साथ ही रखा. यहां तक कि वशिष्ठ नारायण ने अपनी आखिरी सांस भी भाई के पास ही ली. सिंह को पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा के साथ ही परिवार के सामने खुशी के साथ ही उनके जाने के दुख ने भी घर कर लिया. परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनकी कुर्सी आज भी वहीं रखी है, जहां पर वे बैठकर घंटों गणित के सवालों को हल किया करते थे. उनके कमरे में तस्‍वीरें, मेडल और अन्य सामान को सहेज कर रखा गया है.

बिहार सरकार का रवैया उदासीन

वहीं राम अयोध्या सिंह ने कहा कि कोईलवर पुल के समानांतर बन रहे पुल का नाम भी वशिष्ठ बाबू के नाम पर रखा जाना चाहिए. इसके लिए आरा के सांसद आर के सिंह ने आश्वासन दिया है. वहीं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी सहमति जताई है लेकिन बिहार सरकार का रवैया उदासीन है और उन्होंने अब तक कोई भी प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेजा है. परिवार के अनुसार, अप्रैल तक पुल बनकर तैयार हो जाएगा और ऐसे में सरकारी स्तर पर लापरवाही से दुख होता है. वहीं उनके भतीजे राकेश सिंह ने कहा कि वशिष्ठ बाबू खुद सम्मान के प्रतीक थे और उनका सम्मान होना राज्य का सम्मान है.

Sources:-News18.com

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