new rule vaishno devi visit

अब वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा होगी और आसान, इस तारीख से शुरू होगा रोपवे का ट्रायल

आस्था

जम्मू कश्मीर के रिआसी जिले में त्रिकुटा पहाड़ी में स्थित माता वैष्णोदेवी मंदिर के लिए रोपवे का प्रायोगिक परीक्षण 25 मई से शुरू होगा और 20 दिनों तक चलेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज यहां यह जानकारी दी। यह परीक्षण विशेषज्ञों की टीम की निगरानी में होगा।

उन्होंने कहा कि रोपवे के जून में चालू होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 मई को ताराकोटे मार्ग का उद्घाटन करेंगे। वैष्णोदेवी मंदिर के लिए यह मार्ग वैकल्पिक सात किलोमीटर का रास्ता होगा।

श्री माता वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड के अतिरिक्त सीईओ डॉ एम के कुमार ने कहा कि भवन से भैरो घाटी तक यात्री रोपवे परियोजना का प्रायोगिक परीक्षण 25 मई से शुरू होगा।

उन्होंने कहा कि प्रायोगिक परीक्षण 15 जून तक चलेगा और इस दौरान सुरक्षा और आपात तंत्र सहित विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कल मार्ग पर आंशिक परीक्षण किया गया और यह सफल रहा।

वैष्णो देवी उत्तरी भारत में सबसे पूजनीय पवित्र स्थलों में से एक है। मंदिर, 5,200 फ़ीट की ऊंचाई और कटरा से लगभग 12 किलोमीटर (7.45 मील) की दूरी पर स्थित है। हर साल लाखों तीर्थयात्री मंदिर का दर्शन करते हैं और यह भारत में तिरूमला वेंकटेश्वर मंदिर के बाद दूसरा सर्वाधिक देखा जाने वाला धार्मिक तीर्थ-स्थल है।

इस मंदिर की देख-रेख श्री माता वैष्णो देवी तीर्थ मंडल द्वारा की जाती है। तीर्थ-यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए उधमपुर से कटरा तक एक रेल संपर्क बनाया गया है।

माता वैष्णो देवी को लेकर कई कथाएँ प्रचलित हैं। एक प्रसिद्ध प्राचीन मान्यता के अनुसार माता वैष्णो के एक परम भक्त श्रीधर की भक्ति से प्रसन्न होकर माँ ने उसकी लाज रखी और दुनिया को अपने अस्तित्व का प्रमाण दिया। एक बार ब्राह्मण श्रीधर ने अपने गाँव में माता का भण्डारा रखा और सभी गाँववालों व साधु-संतों को भंडारे में पधारने का निमंत्रण दिया। पहली बार तो गाँववालों को विश्वास ही नहीं हुआ कि निर्धन श्रीधर भण्डारा कर रहा है।

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श्रीधर ने भैरवनाथ को भी उसके शिष्यों के साथ आमंत्रित किया गया था। भंडारे में भैरवनाथ ने खीर-पूड़ी की जगह मांस-मदिरा का सेवन करने की बात की तब श्रीधर ने इस पर असहमति जताई। अपने भक्त श्रीधर की लाज रखने के लिए माँ वैष्णो देवी कन्या का रूप धारण करके भण्डारे में आई। भोजन को लेकर भैरवनाथ के हठ पर अड़ जाने के कारण कन्यारूपी माता वैष्णो देवी ने भैरवनाथ को समझाने की कोशिश की किंतु भैरवनाथ ने उसकी एक ना मानी।

जब भैरवनाथ ने उस कन्या को पकड़ना चाहा, तब वह कन्या वहाँ से त्रिकूट पर्वत की ओर भागी और उस कन्यारूपी वैष्णो देवी हनुमान को बुलाकर कहा कि भैरवनाथ के साथ खेलों मैं इस गुफा में नौ माह तक तपस्या करूंगी। इस गुफा के बाहर माता की रक्षा के लिए हनुमानजी ने भैरवनाथ के साथ नौ माह खेला।

आज इस पवित्र गुफा को ‘अर्धक्वाँरी’ के नाम से जाना जाता है। अर्धक्वाँरी के पास ही माता की चरण पादुका भी है। यह वह स्थान है, जहाँ माता ने भागते-भागते मुड़कर भैरवनाथ को देखा था। कहते हैं उस वक्त हनुमानजी माँ की रक्षा के लिए माँ वैष्णो देवी के साथ ही थे।

हनुमानजी को प्यास लगने पर माता ने उनके आग्रह पर धनुष से पहाड़ पर एक बाण चलाकर जलधारा को निकाला और उस जल में अपने केश धोए। आज यह पवित्र जलधारा ‘बाणगंगा’ के नाम से जानी जाती है, जिसके पवित्र जल का पान करने या इससे स्नान करने से भक्तों की सारी व्याधियाँ दूर हो जाती हैं।

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त्रिकुट पर वैष्णो मां ने भैरवनाथ का संहार किया तथा उसके क्षमा मांगने पर उसे अपने से उंचा स्थान दिया कहा कि जो मनुष्य मेरे दर्शन के पशचात् तुम्हारे दर्शन नहीं करेगा उसकी यात्रा पूरी नहीं होगी। अत: श्रदालु आज भी भैरवनाथ के दर्शन को अवशय जाते हैं।

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