‘उन्हें सब कुछ कबूल था, अंग्रेजों की गुलामी नहीं’, स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी बोलीं- अंगारों पर चलने जैसा था..

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नवगछिया अनुमंडल की धरती आजादी आंदोलन के दौरान देश पर मर मिटने वाले सपूतों की धरती है। उन्हीं देशभक्तों में से एक बिहपुर प्रखंड के अमरपुर गांव निवासी स्वतंत्रता सेनानी विशुनदेव सिंह हैं। जिन्हें सब कुछ कबूल था, मगर अंग्रेजों की गुलामी नहीं।

आज इनके पूरे परिवार का सिर तब और गर्व से ऊंचा हो जाता है, जब उनका परिचय विशुनदेव सिंह नाम से होता है। इनकी पत्नी 85 वर्षीय सावित्री देवी कहती हैं कि आज भी गर्व के साथ मेरा मस्तक हिमालयी हो जाता है, जब मैं कहती हूं कि मैं भारत मां के सच्चे सपूत स्वतंत्रता सेनानी विशुनदेव सिंह की पत्नी हूं।

आजादी आंदोलन में सक्रिय थे विशुनदेव सिंह

सावित्री देवी ने कहा, ” मेरी शादी 1951 में तब हुई थी, जब मेरी उम्र करीब 11-12 साल थी। विशुनदेव बाबू आजादी आंदोलन में काफी सक्रिय थे। उस वक्त अंग्रेजों से लोहा लेने का मतलब अंगारों से खेलना था।

हालांकि, इन सबका परवाह किए बिना वे आजादी की लड़ाई में कूद गए थे। मेरे तीन बेटे- प्रभाषचंद्र चौधरी, चंद्रशेखर चौधरी व संजय कुमार चौधरी और पांच बेटियां हैं।”

उन्होंने कहा, “वर्ष 1942 में बिहपुर में रेल पटरी उखाड़ने के दौरान अन्य स्वतंत्रता सेनानी के साथ वे भी अंग्रेज पुलिस के हत्थे चढ़ गए। उन्हें भागलपुर सेंट्रल जेल भेजने के पहले अंग्रेज पुलिस ने उनके एक हाथ को पूरी तरह से तोड़ दिया था। वे एक साल तक जेल में रहे, लेकिन आजादी आंदोलन का जज्बा उनका और भी बढ़ गया था।”

अन्याय के खिलाफ झुकना नहीं सिखाया

पुत्र संजय चौधरी ने कहा, “मेरे पिता ने हमें भी सिखाया है कि कभी अन्याय व दमन के खिलाफ झुकना नहीं और अपने ईमानदारी व सत्कर्म से डिगना नहीं है, क्योंकि अन्याय करने वाले की तरह ही अन्याय को सहते रहने वाला भी गलत है। उनका कहना था अन्याय के खिलाफ चुप रहने वाला इंसान कहलाने लायक नहीं है।”

कई बार हो चुकी हैं सम्मानित

स्वतंत्रता सेनानी विशुनदेव सिंह का निधन 28 फरवरी 1981 को हुआ था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2017-18 में चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष पर पटना में विशुनदेव सिंह की पत्नी सावित्री देवी को सम्मानित किया था।

इससे पूर्व दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में भी तत्कालीन केंद्र में पीवी नरसिंहा राव सरकार के मंत्री रहे एसबी चौहान ने भी सावित्री देवी को सम्मानित किया है।

वहीं, दिल्ली में स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के राष्ट्रीय पदाधिकारी शील भदोरिया व केसी पंत के अलावा बिहपुर प्रखंड मुख्यालय में भी अधिकारियों द्वारा कई बार सम्मानित हो चुकी हैं।

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