बिहार के उलार में श्रीकृष्ण के पुत्र द्वारा बनवाये सूर्य मंदिर में छठ मानाने जाते हैं लाखों व्रती

आस्था

पटना जिले का उलार सूर्य मंदिर शामिल है देश के 12 प्रसिद्ध सूर्य मंदिरों में। देश के 12 आर्क स्थलों में कोणार्क और देवार्क (बिहार का देव) के बाद उलार (उलार्क) भगवान भास्कर की सबसे बड़े तीसरे सूर्य आर्क स्थल के रुप में जाना जाता है।

लोककथाओं के अनुसार कई राजा- महाराजाओं दूारा मंदिर में सूर्य उपासना कर मन्नत मांगने के बाद संतान प्राप्ति की बात कही गई है। चैती एवं कार्तिक, दोनों छठ पर यहां लाखों लोगों की भीड़ जुटती है। माना जाता है कि सच्चे मन से जो निसंतान सूर्य की उपासना करते है। उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। यहाँ पुत्र प्राप्ति के बाद मां द्वारा आंचल में पुत्र के साथ नटुआ व जाट-जटिन के नृत्य करवाने की परंपरा है।

एक प्रसिद्ध मान्यता के मुताबिक़ द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र शाम्ब ऋषि-मुनियों के श्राप की वजह से कुष्ठ रोग से पीड़ित थे। नारद जी ने उन्हें श्राप मुक्ति के लिए 12 स्थानों पर सूर्य मंदिर की स्थापना कर सूर्य की उपासना का उपाय बताया उसी क्रम में शाम्ब ने उलार्क (अब उलार), लोलार्क, औंगार्क, देवार्क, कोर्णाक समेत 12 स्थानों पर सूर्य मंदिर बनवाए और उलार के तलाब में सवा महीने तक स्नान कर सूर्य की उपासना की थी। इससे वे कुष्ठ रोग से मुक्त हो गए थे। बाद में मुस्लिम शासकों द्वारा उलार मंदिर को ध्वस्त कर दिया फिर। फिर 1950-54 में खुदाई में काले पत्थर की पालकालीन खंडित मूर्तियां मिलने पर संत अलबेला बाबा ने जन सहयोग से मंदिर का जीर्णोंद्धार कराया और फिर इन खंडित मूर्तियों की भी पूजा होने लगी।

हर रविवार को भारी संख्या में पीड़ित लोग स्नान कर सूर्य को जल व दूध अर्पित करते है। मंदिर के पास पहुंचने वाले दो सौ मीटर का संपर्क पथ है जिसके चौड़ीकरण व मरम्मत की मांग हमेशा उठती है। लेकिन दुर्भाग्य से आजतक सरकार की तरफ से सिर्फ उपेक्षा ही मिली। संपर्क पथ पर भारी मात्रा में गंदगी होने से लाखों की संख्या में आने वाले व्रतियों व उनके परिजनों के लिए शौचालय की भी व्यवस्था नहीं होती है।

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