भारत की दो बेटियाँ MBA और CA की नौकरी छोड़ कर रही फूलों की खेती, विदेशों तक व्यवसाय पहुँचाने का है लक्ष्य

कही-सुनी

Patna: हमारे देश की अर्थव्यवस्था कृषि पर ही आश्रित है। ऐसे में अगर कोई कृषि से जुड़ा हुआ काम कर रहा है या खेती कर रहा है तो यह देश के लिए सबसे बड़ी देश सेवा होगी। हमारे भारत की दो बेटियाँ जो हायर एजुकेशन लेने के बाद भी अपनी-अपनी नौकरी छोड़ खेती कर हमारे देश की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दे रही हैं।

इन दोनों बेटियों का नाम है शिवानी माहेश्वरी (Shivani Maheshwari) और वामिका बेहती (Vamika Behati). जयपुर की रहने वाली शिवानी महेश्वरी जिनकी उम्र अभी सिर्फ़ 23 वर्ष है। शिवानी एमबीए ग्रेजुएट हैं। तो वही वामिका बेहती जो दिल्ली की रहने वाली हैं। इनकी उम्र 25 वर्ष है और वामिका एक चार्टर्ड अकाउंटेंट है। इन दोनों ने अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ हरियाणा में फूलों की खेती का व्यवसाय कर रही हैं और आज के समय में दोनों एक सफल किसान के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।

शिवानी ने बताया कि साल 2015 में उन्हें पहली बार फूलों की खेती करने का विचार उस वक़्त आया जब उन्हें रोहतक दिल्ली जाने के दौरान एक बार पॉलीहाउस फार्मिंग नेट देखने का मौका मिला। वहाँ कुछ तस्वीरों को शिवानी ने अपने कैमरे में क़ैद कर लिया और वापस आने के बाद उन्होंने इंटरनेट पर फूलों की खेती पर रिसर्च करना शुरू किया। फिर उनकी मुलाकात उनकी सहयोगी वामिका से हुई उसके बाद दोनों एक साथ मिलकर हरियाणा में इस व्यवसाय को शुरू की।

इस क्षेत्र में कारोबार की बड़ी संभावना को नकारा नहीं जा सकता

वही बात अगर भारत की फ्लोरिकल्चर इंडस्ट्री की करें तो इसकी सलाना ग्रोथ 30 फीसदी की रफ़्तार से भी तेज हो रही है और इंडस्ट्री बॉडी एसोचैम के अनुसार आने वाले कुछ वर्षों में इंडस्ट्री का मार्केट लगभग 10 हज़ार करोड़ रुपये के पार पहुँच जाएगी। ऐसे में इस क्षेत्र में कारोबार की बड़ी संभावना को नकारा नहीं जा सकता और फूलों के इस व्यवसाय को शुरू कर हरियाणा में वामिका और शिवानी बाक़ी किसानों की भी मदद कर रही है और उन्हें खेती के अच्छे तरीके, तकनीकों और इससे जुड़े व्यवसाय के बारे में बता रही हैं।

यूनिस्टार एग्रो नाम की एक फार्म की शुरुआत की

आपको बता दे तो हरियाणा विशेष रूप से वहाँ के किसानों और खेती के लिए काफ़ी प्रसिद्ध है। इसलिए वहाँ फूलों के व्यवसाय को शुरू करना इन दोनों के लिए काफ़ी बेहतर रहा। वामिका के पास बहादुरगढ़ में एक फैक्ट्री और झझर जिले के तंडाहेरी गाँव में खाली ज़मीन भी थी, जिस पर दोनों ने साथ मिलकर यूनिस्टार एग्रो नाम की एक फार्म की शुरुआत की। वहाँ दोनों लिलियम, गेरबेरा, गुलाब, रजनीगंधा और ग्लेडियोलस की खेती कर रही हैं।

बाकी किसानों को ऑर्गेनिक खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं

दोनों बेटियों की अपनी-अपनी पढ़ाई का भी इस व्यवसाय में पूरा फायदा हुआ। वामीका की शादी भी एक बिजनेसमैन से हुई है और उनके पति भी इस व्यवसाय में पूरा सहयोग करते हैं और सलाह देते हैं। अब तो हरियाणा सरकार भी इन दोनों के उद्यम यूनिस्टार एग्रो को सहायता प्रदान कर रही है और इसके पीछे का कारण यही है कि इन्हें पूरी तरह से इस व्यवसाय के बारे में तकनीकी जानकारी है और यह बाक़ी किसानों को भी ऑर्गेनिक खेती करने के लिए सहयोग और प्रोत्साहित कर रही हैं।

सरकार सब्सिडी और इंसेंटिव भी दे रही है

वर्तमान समय में दोनों बेटियों का फूलों का व्यवसाय बहुत आगे बढ़ चुका है। इनके हौसले मेहनत को देखते हुए सरकार ने सब्सिडी और इंसेंटिव देना भी शुरू कर दिया है। इनकी वज़ह से ही वहाँ के सारे किसानों को बहुत फायदा पहुँच रहा है। अपने भविष्य के लक्ष्य के बारे में दोनों का कहना है कि वह अपने इस व्यवसाय को पूरे भारत में फ़ैलाना चाहती हैं और भारत के साथ-साथ उनका सपना अपने इस व्यवसाय को विदेशों तक भी पहुँचाने का है। ये किसानों को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने को भी अपनी प्राथमिकता देती हैं।अगर ऐसे ही हमारे भारत के युवा अपने शिक्षा का प्रयोग कर नए-नए तरीकों और तकनीकों को आजमाएँ तो निश्चित ही हमारा भारत भी विकसित देशों की सूची में शुमार हो जाएगा।

Source: Awesome Gyan

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