कानपुर चिड़ियाघर की तर्ज पर पटना चिड़ियाघर में भी अब ध्वनिमुक्त शिशु रेल चलेगी

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कानपुर चिड़ियाघर की तर्ज पर संजय गांधी जैविक उद्यान में भी अब ध्वनिमुक्त (बैट्रीचालित) शिशु रेल चलेगी. उद्यान निदेशक अमित कुमार, कानपुर और लखनऊ चिड़ियाघर में चल रही शिशु रेल का अध्ययन करके पटना आ गए हैं. निदेशक ने बताया कि कानपुर चिड़ियाघर में बैट्री से संचालित ट्रेन चार वषरे से चल रही है. जबकि, लखनऊ चिड़ियाघर में पटना की तरह डीजल से चलने वाली ट्रेन चलती है. कानपुर जैसी ही ट्रेन चलाने का प्रस्ताव बनाकर केंद्रीय चिड़ियाघर को भेजा जाएगा.

उद्यान निदेशक ने बताया कि रेलवे ट्रैक का रूट नहीं बदलेगा. सिर्फ गैंडा प्रजनन केंद्र के क्षेत्र में इसका निर्माण नहीं होगा. नया ट्रैक और पटरी बिछेगी तथा नयी ध्वनिमुक्त शिशु रेल आएगी. बता दें कि 2014 से उद्यान में रेल परिचालन बंद हैं. चिड़ियाघर भ्रमण करने के लिए आने वाले दर्शक शिशु रेल के परिचालन बंद रहने के कारण मायूस होकर चले जाते थे. यह ट्रेन गाइड का भी काम करती थी.

 

संजय गांधी जैविक उद्यान में बच्चे के लिए बिना पटरी के ट्वाय शिशु रेल भी चलेगी. यह ट्रेन उद्यान की सड़कों पर बच्चों को लेकर छुकछुक करते दौड़ेगी. 31 अगस्त को इसके लिए निविदा खुलेगी. इस ट्रेन पर चिड़ियाघर प्रशासन कोई राशि नहीं खर्च करेगा. निजी पार्टी परिचालन कराएगी तथा मुनाफे से चिड़ियाघर को भी राशि देगी. निविदा में कंपनी तय होने के बाद अनुमति दे दी जाएगी. सबकुछ ठीक रहा तो दुर्गा पूजा तक उद्यान में बिना पटरी वाली ट्रेन बच्चों को लेकर दौड़ लगाते नजर आएगी. इसका मूल्य करीब 45 लाख रुपये है. यह ट्रेन 20 सीट की होगी. ये देखने में काफी आकर्षक होगी.

ट्वाय ट्रेन से बच्चे चिड़ियाघर की सैर करेंगे. ट्रेन प्रत्येक केज तक जाएगी. बाघ, शेर, हिरण, भालू, तेंदुआ, चिम्पैंजी, गैंडा, हाथी, जिराफ, हिप्पोपोटामस सहित उद्यान के सभी वन्य प्राणियों को दिखाएगी. ट्रेन हर केज तक भ्रमण करेगी. इसमें वास्तविक ट्रेन जैसे इंजन और डिब्बे रहेंगे. आवाज भी ट्रेन जैसी ही निकलेगी. यह पटरी पर नहीं, बल्कि सड़कों पर दौड़ेगी. अंतर बस इतना रहेगा कि इस ट्रेन को पटरी की जरूरत नहीं होगी. यह सड़कों पर फर्राटा भरेगी.

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