सुल्तानगंज जाने वाली ट्रेनों में पैर तक रखने की जगह नहीं, इंजन पर चढ़कर जा रहे कांवरिए

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किऊल स्टेशन बोल बम के नारों से गूंज रहा है। खासकर शनिवार एवं रविवार को कांवरियों की ज्यादा भीड़ स्टेशन पर उमड़ रही है। ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं मिल रही तो इंजन पर चढ़कर कांवरिए सुल्तानगंज तक की यात्रा कर रहे हैं। प्लेटफार्म से लेकर रेलवे पटरियो तक कांवरिए ही कांवरिए ही दिख रहे हैं। श्रावणी मेले के दौरान रोजाना करीब 25- 30 हजार कांवरिए किऊल से सुल्तानगंज की यात्रा करते हैं। रेलवे द्वारा श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेनों के परिचालन नहीं करने से सामान्य यात्रियों को परेशानी हो रही है।

किऊल से सुल्तानगंज तक की 74 किमी की यात्रा मुश्किल हो गई है। दूसरे रूट के कांवरिए किऊल से ही सुल्तानगंज की यात्रा शुरू करते हैं। श्रावणी मेले के लिए इस साल किऊल के रास्ते श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेन नहीं चली। 2018 से स्पेशल ट्रेनों का परिचालन बंद किया गया। किऊल-भागलपुर रूट में पहले से नियमित ट्रेनें कम है। स्पेशल ट्रेनें चलतीं तो सुल्तानगंज तक के सफर में आम यात्री सहित कांवरियों को भी राहत मिलती।

विद्युतीकरण के बाद छत पर चढ़ने पर लगी रोक
पूर्व में सैकड़ों कांवरिए ट्रेनों की छतों पर सवार होकर भी सुल्तानगंज की यात्रा करते थे। अब छत पर सवार होने के बजाए कांवरिए ट्रेनों के पायदान एवं इंजन पर सवार होकर अपनी यात्राएं पूरी करते हैं। हालांकि इलेक्ट्रिफिकेशन के बाद अब इसमें कमी आ गई है।

कई बार किया निरीक्षण सुविधा नहीं हुई बहाल
सावन में कांवरियों-यात्रियों की किऊल स्टेशन पर होने वाली भीड़ को सुविधा देने के लिए दानापुर के डीआरएम, एडीआरएम, आरपीएफ कमांडेंट आदि अधिकारी ने किऊल स्टेशन का निरीक्षण किया। पानी, शेड, शौचालय आदि की व्यवस्था करने का निर्देश दिया था। लेकिन कुछ नहीं हुआ।


Sources:-Dainik Bhasakar

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