रविवार, को आश्विन मास की पूर्णिमा है, इसे शरद पूर्णिमा कहा जाता है। शरद पूर्णिमा का महत्व काफी अधिक माना गया है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं। मान्यता है कि इस तिथि पर देवी लक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और पूछती हैं कि कौन जाग रहा है? इसी वजह से इसे कोजागरी पूर्णिमा कहते हैं। जानिए कुछ खास बातें…

  • मान्यता है इस रात चंद्रमा से बरसता है अमृत

शरद पूर्णिमा से जुड़ी कई मान्यताएं प्रचलति हैं। माना जाता है कि इस तिथि की रात चंद्रमा की किरणें अमृतमयी गुणों से युक्त रहती हैं, जो कई बीमारियों की रोकथाम करती हैं। यही कारण है कि शरद पूर्णिमा की रात को लोग अपने घरों की छतों पर खीर बनाते हैं। खीर पर चंद्रमा की किरणें पड़ती हैं। इसका सेवन किया जाता है। कुछ स्थानों पर सार्वजनिक रूप से खीर प्रसादी का वितरण किया जाता है।

  • खीर से जुड़ी खास बातें

शरद पूर्णिमा से मौसम में परिवर्तन की शुरूआत होती है। इस तिथि के बाद से वातावरण में ठंडक बढ़ने लगती है। शीत ऋतु का आगमन होता है। शरद पूर्णिमा की रात में खीर का सेवन करना इस बात का प्रतीक है कि शीत ऋतु में हमें गर्म पदार्थों का सेवन करना चाहिए, क्योंकि इन्हीं चीजों से ठंड में शक्ति मिलती है। खीर में दूध, चावल, सूखे मेवे आदि पौष्टिक चीजें डाली डाती हैं, जो कि शरीर के लिए फायदेमंद होती हैं। इन चीजों की वजह से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। अच्छा स्वास्थ्य मिलता है।

  • शरद पूर्णिमा की रात ही श्रीकृष्ण ने रचाया था रास

श्रीकृष्ण से जुड़ी मान्यता प्रचलित है कि शरद पूर्णिमा की रात ही श्रीकृष्ण ने गोपियों संग रासलीला रचाई थी। इसी वजह से वृंदावन में आज भी शरद पूर्णिमा पर विशेष आयोजन किए जाते हैं। इसे रासलीला की रात भी कहा जाता है। एक अन्य मान्यता यह है कि इस रात महालक्ष्मी पृथ्वी का भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन जाग रहा है और जो जाग रहा होता है, लक्ष्मी उसके घर निवास करती हैं। इस कारण शरद पूर्णिमा की रात जागरण का विशेष महत्व है। लोग रातभर जाग पूजा-पाठ करते हैं। घर के बाहर लक्ष्मी के स्वागत के लिए दीपक जलाए जाते हैं।

Sources:-Dainik Bhasakar

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