इस महिला का कद नहीं काम बोलता है, देश की लड़कियों के लिए मिसाल हैं महिला IAS आरती डोगरा

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पटना: राजस्थान के बीकानेर और बूंदी जिलों में कलक्टर रह चुकीं आरती डोगरा अब अजमेर की नई कलेक्टर नियुक्त की गई हैं। सरकार ने उन्हें हाल में अजमेर के जिला कलेक्टर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। अभी तक वो जोधपुर डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक का पदभार संभाल रहीं थीं। वे डिस्कॉम के एमडी पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला आईएएस अफसर थीं। इससे पहले डोगरा, बीकानेर कलेक्टर सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवा चुकीं हैं। आरती मूल रूप से देहरादून की रहने वाली हैं लेकिन उन्होंने राजस्थान में परचम बुलंद किया हुआ है।

बीकानेर कलेक्टर रहते हुए अप्रैल, 2013 में उन्होंने खुले में शौच से मुक्ति का अभियान ‘बंको बीकाणो’ की शुरुआत की थी, जिसकी काफी सराहना हुई। उनके इस अभियान को पंजाब, मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी सराहा गया। अभियान के तहत गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को खुले में शौच न करने के लिए प्रेरित किया गया। इस अभियान के तहत 196 ग्राम पंचायतों का सत्यापन किया गया।

आरती वैसे आज एक सक्सेफुल महिला हैं लेकिन एक वक्त था जब उन्हें लगा ये मेरे बस की नहीं। उन्होंने गिव-अप करने के बजाए अपने आप को प्रूव करने की ठानी। इसका ही नतीजा है कि वे आईएएस अफसर हैं। आरती डोगरा बताती हैं कि सिविल सर्विसेज में जाने का निर्णय उनका था।

इस दौरान कुछ विषयों के समझ न आने पर लगा भी कि ये मेरे से नहीं होगा लेकिन पेरेंट्स ने हिम्मत बंधाते हुए ईमानदारी से अपना 100 प्रतिशत देने का हौसला जगाया और मैंने अपना लक्ष्य हासिल किया।

एक वर्किंग वुमन होने के बाद भी मां को अच्छे से घर संभालता देख आरती ने जिम्मेदारियों को निभाना समझा और अपने निर्णय लेने सीखे। आईएएस डोगरा के अनुसार पिता कर्नल राजेन्द्र डोगरा भारतीय सेना में अफसर रहे हैं।

वे ज्यादातर समय भारतीय बॉर्डर पर रहते। विपरीत हालात में रहकर भी उन्होंने कभी अपना धैर्य नहीं खोया। आरती कहती हैं कि हिम्मत न हारने का जज्बा उन्होंने पिता से ही सीखा है। घर में कैसी भी स्थिति हो, लेकिन उनके पेरेंट्स हमेशा सकारात्मक रवैया रखते।

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