इस बार यूरोप नहीं चख पाएगा शाही लीची

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मुजफ्फरपुर की एक मात्र इंटरनेशनल ब्रांड लीची इस बार संकट में है। दशकों बाद अमेरिकन और यूरोपीय  देशों में लीची निर्यात करने का सिलसिला टूटना लगभग तय है। इससे न केवल यहां के उत्पादकों और निर्यातकों को करोड़ों का नुकसान होगा बल्कि लीची की ब्रांड इमेज को भी झटका लगेगा। वहीं देश के बाजार में इस बार लीची की लाली ‘लॉकडाउन’ रहेगी।
दो साल पहले मुजफ्फरपुर की शाही लीची को जीआई (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैग मिला था। टैग मिलने के साथ ही यहां की लीची अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहले से और अधिक स्थापित हो गई। निर्यात की मात्रा भी बढ़ी और कीमत भी अधिक मिलने लगी। जिले से लगभग दस हजार टन लीची का निर्यात किया जाता है। इनमें लगभग नब्बे फीसदी अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों में भेजी जाती है। जिले का यह एक मात्र उत्पाद है जो डॉलर और यूरो दिलाता है। कोरोना के ग्रहण के कारण इस बार निर्यात होना संभव नहीं दिख रहा है। मुजफ्फरपुर और हाजीपुर के निर्यातकों ने बताया कि कोरोना का सबसे अधिक आतंक इन्हीं सभी देशों में है। अमेरिका और यूके का हाल तो बहुत बुरा है। एक्सपोर्ट के संबंध में अभी वहां कोई बात करने को भी तैयार नहीं है। 15 मई से लीची टूटने लगती है। 20 के बाद निर्यात शुरू हो जाता है। उसकी तैयारी अभी से शुरू हो जाती है। दिल्ली के कारोबारी इसमें लाइनर का काम करते हैं।

असर अगले साल तक दिखेगा
मुजफ्फरपुर से निर्यात करने वाली एजेंसी आरके केडिया  इंटरनेशनल के मालिक आलोक केडिया ने बताया कि अमेरिका और यूरोपीय देशों में लीची भेजना इस बार संभव नहीं है। वहां के बाजार कब तक ठप रहेंगे, कहना मुश्किल है। कोई संपर्क भी मुश्किल है। इसी तरीके से हजारों टन लीची के प्रोसेस्ड आइटम (पल्प व जूस) नेपाल स्थित निजी कंपनी को आपूर्ति की जाती थी। इस बार वह भी संभव नहीं दिख रहा। निर्यात का सिलसिला टूटने का बुरा असर भविष्य पर भी पड़ेगा। वहीं लीचिका इंटरनेशनल के मालिक केपी ठाकुर ने बताया कि प्रोसेसिंग का आधा से अधिक काम मुंबई में होता है। इस बार संभव नहीं है। लीची के प्रोसेस्ड आइटम भी इस बार विदेश नहीं भेजे जा सकते हैं।


देश के बाजार में खपाना आसान नहीं होगा
लीची के बड़े उत्पादक भोला नाथ झा ने बताया कि विदेश के साथ ही इस बार देश के बाजारों में भी लीची का खपाना आसान नहीं होगा। सरकार सहूलियतें दे रही है मगर मुंबई और दिल्ली में कोरोना की महामारी अन्य प्रदेशों से अधिक है। तीन लाख टन से अधिक लीची को इस बार बाजार का संकट उत्पन्न हो सकता है। मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों के पचास हजार से अधिक किसान प्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हैं जबकि ऐसे तीन लाख से अधिक लोग इससे जुड़े होते हैं।

Sources:-Hindustan

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