सीवान के इस शिव मंदिर का है विशेष महत्त्व , सावन में लगता है भक्तों का जमावड़ा

आस्था

पटना: सावन का पवित्र माहचल रहा है और इन दिनों भारत सहित कई देशो में भगवान शिव की भक्ति खूब धूमधाम से की जा रही है। बिहार सहित कई राज्यों के श्रद्धालु यूँ तो झारखण्ड स्थित देवघर में सावन के अवसर पर जलाभिषेक करने जाते है ,वहीँ बिहार में भी ऐसे कई प्रसिद्ध शिव मंदिर है जहाँ शिव भक्त कांवर यात्रा करके भगवान शिव पर जलाभिषेक करते है।

जी हाँ हम बात कर रहे है बिहार के सीवान के सोहगरा धाम की जहाँ के बारे में मान्यता है कि यहां पूजा अर्चना और जलाभिषेक करने से न सिर्फ मनचाही मुरादें पूरी होती है बल्कि सुयोग्य वर यानि की पति और संतान की प्राप्ति भी होती है. सीवान के सोहगरा धाम में स्थित बाबा हंस नाथ मंदिर में स्थापित विशाल शिवलिंग पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करते है और मन की मुराद ईश्वर को बताते है।

सीवान जिले के गुठनी प्रखंड स्थित सोहगरा धाम का सावन के पवित्र महीने में विशेष महत्व है। यहाँ भगवान शिव की आराधना के लिए दूर-दूराज से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते है। खासकर सोमवार के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है. यूँ तो सोहगरा धाम के के बाबा हंस नाथ मंदिर में सालों भर शिव भक्तों का मेला लगा रहता है. लेकिन, सावन के विशेष माह में आस्था और श्रद्धा की एक अलग ही छटा देखने को मिलती है।

मंदिर का इतिहास
कहा जाता है कि बाबा हंस नाथ मंदिर में स्थित विशाल शिवलिंग अपने आप प्रकट हुआ था जिसकी पूजा राक्षसराज वाणासुर की पुत्री उषा ने किया तो उनका विवाह भगवान श्री कृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के साथ हुआ। वहीँ इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि काफी समय पहले काशी नरेश राजा हंस ध्वज ने संतान प्राप्त के लिए यहां पूजा अर्चना की थी जिसके बाद उनकी मुराद पूरी हो गई। इससे खुश होकर राजा हंसनाथ ने यहाँ विशाल शिव मंदिर का निर्माण करवाया तब से इस मंदिर का नाम बाबा हंसनाथ मंदिर हो गया।

वहीँ इस मंदिर के बारे में पुजारियों का मानना है कि यह मंदिर द्वापर युग का है जहां पूर्व में विशाल जंगल हुआ करता था. पुजारियों के अनुसार राक्षस राज रावण के मित्र बाणासुर की पुत्री उषा को भ्रमण के दौरान यहां विशाल शिवलिंग मिला था.

होती है सभी मन्नते पूरी
इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर में मांगी हर मन्नत पूरी होती है। यहां पूजा अर्चना और जलाभिषेक करने से न सिर्फ मनचाही मुरादें पूरी होती है बल्कि सुयोग्य वर यानि की पति और संतान की प्राप्ति भी होती है. हर वर्ष सावन के महीने में श्रद्धालुओं खासकर महिलाएं और कुंवारी युवतियों का पूजा करने के लिए तांता लग जाता है

Source: Bihari.news

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