gandhi setu construction

अगले महीने से टूटेगा गांधी सेतु का यह भाग, बढ़ जाएगी परेशानी

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पटना:  नवनिर्माण के लिए गांधी सेतु को तोड़ने का सिलसिला अगले महीने पानी में प्रवेश करेगा. दिसम्बर से उन स्पैन को तोड़ने का काम शुरू होगा, जिनके नीचे गंगा बह रही है. तोड़ते समय मलबा पानी में नहीं गिरे इसका मुकम्मल इंतजाम एजेन्सी ने कर लिया है. ऐसी मशीनें मंगा ली गई हैं, जिनके सहारे मलबे को ऊपर-ऊपर ही पानी से बाहर वाले भाग में लाया जाएगा. पटना में गांधी सेतु का नवनिर्माण निर्माण के क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी और पहली घटना है.

इसके दोनों लेनों के सुपरस्ट्रक्चर को तोड़कर नया बनाना है. अभी पश्चिमी लेन को तोड़ने का काम चल रहा है. इसके बन जाने के बाद पूर्वी लेन को तोड़ने का काम शुरू होगा. पुराना सुपरस्ट्रक्चर कंक्रीट का है उसकी जगह अब स्टील का सुपरस्ट्रक्चर लगाना है. पुल तोड़ने की शुरुआत हाजीपुर छोर से की गई है. अब तक एजेन्सी ने 15 स्पैन को तोड़ने का काम पूरा कर लिया है. 16वें स्पैन को तोड़ने का काम चल रहा है.

जब स्पैन तोड़ने का काम पानी वाले भाग में पहुंचेगा तो पुल को ऊपर से सपोर्ट दिया जाएगा, ताकि काटने के बाद कोई टुकड़ा पानी में न गिरे. उसके बाद छोटे-छोटे टुकड़ों में सतह को काटकर मशीन के माध्यम से धीरे-धीरे नीचे लाया जाएगा. पानी में पीपा पुल बनाकर मलबे को बाहर लाया जाएगा.

इंजीनियरों का कहना है कि नए पुल की पूरी डिजाइन आईआईटी रूड़की के इंजीनियरों की देखरेख में बनायी गई है. ऐसा काम पहले कभी हुआ नहीं है, लिहाजा यह बताना कठिन है कि पुल तोड़ने में कितना समय लगेगा. लेकिन इतना तय है कि दो साल में एक लेन का सुपरस्ट्रक्चर बदलने का काम पूरा कर लिया जाएगा.

नवनिर्माण के दौरान भी सेतु पर ट्रैफिक बंद नहीं होगा. लेकिन एक लेन बंद होने पर परेशानी बढ़ेगी. सोनपुर पुल बनकर तैयार हो जाने के बाद भी यह गांधी सेतु का विकल्प नहीं बन पा रहा है. उस पुल पर बड़े वाहनों का परिचालन शुरू नहीं हो पाया है. वहीं जब सेतु को तोड़ने का काम शुरू हुआ तो मुख्य सचिव ने उससे छोटे वाहनों का परिचालन बंद करने का आदेश दिया था, लेकिन जिला प्रशासन ने अब तक उसे बंद नहीं किया है. लिहाजा एक लेन से ही दोनों तरफ के वाहनों को गुजरने से परेशानी बढ़ेगी.

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