इस BJP लीडर के गाने का सावन में है जबदस्त क्रेज, 15 सालों से बना हुआ है कांवरियों की पहली पसंद

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पटना: सावन में कांवरिया पथों पर बोल बम के नारों के साथ-साथ भोजपुरी गानों का क्रेज भी सर चढ़ कर बोल रहा है। कल्पना पटवारी के 2003 में गाए गीत- ए गणेश के पापा, हमसे भांग पिसाई ना… का क्रेज कांवरिया मार्ग में पिछले पन्द्रह सालों से कायम है। वैसे तो मनोज तिवारी, छैला बिहारी, खेसारी लाल, पवन सिंह, निरहुआ और कल्लू जैसे गायकों के गाये गानों का क्रेज भी कुछ कम नहीं है लेकिन कल्पना के इस गाने का तो जवाब नहीं। इस गाने पर कांवरिया खुद को झूमने से रोक नहीं पाते।

तो आपको बताते हैं कल्पना पटवारी के बारे में जो अब बीजेपी लीडर बन चुकी हैं। पटना में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सामने उन्होनें पटना में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी। कल्पना ने ज्वाइन करते वक्त कहा कि उनका राजनीति में आने का मकसद सेवा भाव है और वे नरेंद्र मोदी के विजनरी नेतृत्व से प्रभावित हैं।कल्पना ने कहा था कि नरेंद्र मोदी जी के लाखों-करोड़ों फॉलोवर्स हैं। उनकी लीडरशिप क्वालिटी कमाल की है। मुझे लगा कि अगर अभी मैं उनकी छत्रछाया में नहीं आयी, तो मैं इस उपलब्धि को नहीं जी पाऊंगी।

भोजपुरी गायिका कहती हैं कि बिहार मेरे लिए मंदिर के समान है और छठ मईया ने मुझे इस धरती से चुना है। गौरतलब है कि कल्पना के छठ गीत भी बिहारियों के लिए धरोहर के समान है। शारदा सिन्हा के छठ गीतों के बाद कल्पना के गाए छठ गीत हर बिहारियों के दिल में बसे है। कल्पना असम से हैं। वे भूपेन हजारिका को अपना आदर्श मानती हैं और बिहार के भिखारी ठाकुर अपना इंस्पेरेशन ।

39 वर्षीया कल्पना पटवारी का जन्म असम के बारपेटा में हुआ था और वे इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएट हैं। कल्पना पटवारी ने लखनऊ से संगीत विशारद भी कर रखा है। कल्पना पटवारी ने लोक संगीत की शिक्षा अपने पिता बिपिन पटवारी से ली है जो खुद भी एक लोक गायक थे। कल्पना पटवारी को पूर्वी, कजरी, सोहर, विवाह गीत, चैत और नौटंकी गायकी में महारत हासिल है। कल्पना पटवारी ने भिखारी ठाकुर पर भी खूब काम किया है। कल्पना पटवारी बॉलीवुड में भी अपनी गायकी के हाथ दिखा चुकी हैं।

भोजपुरी म्यूजिक को बुलंदियों पर पहुंचाने वाली सिंगर कल्पना पटवारी ने कोक स्टूडियो में लोक गीत ‘बिरहा’ का आधुनिक संगीत के साथ ऐसा फ्यूजन किया था कि ये सॉन्ग जमकर हिट हुआ। सोनिया सहगल के साथ कल्पना पटवारी की जुगलबंदी को खूब पसंद किया गया था, और इस वीडियो को अभी तक यूट्यूब पर लगभग 22 लाख बार देखा जा चुका है। जुदाई और दर्द का गीत है, लेकिन उसे उन्होंने आधुनिक टच दे दिया है। ‘बिरहा’ परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाने का श्रेय कल्पना पटवारी को ही जाता है।

कल्पना पटवारी असम की रहने वाली लोक गायिका हैं और उन्होंने उस्ताद गुलाम मुस्तफा से संगीत की शिक्षा ली है। कल्पना पटवारी की आवाज कमाल है, और उन पर भूपेन हजारिका का काफी प्रभाव माना जाता है।

कल्पना ने भोजपुरी संगीत को अलग पहचान दिलाई और उन्होंने अश्लीलता से कोसों दूर ले जाकर खुद के साथ ही भोजपुरी संगीत को भी एक नये मुकाम पर पहुंचाया। कल्पना को ‘भोजपुरी क्वीन’ भी कहा जाता है। कल्पना पटवारी चार साल की उम्र से ही परफॉर्म कर रही हैं।

Source: Live Bihar

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