इस IPS को कभी कर दिया गया था डिसमिस, मां की भक्ति में कुछ ऐसी रहीं डूबी

आस्था

पटना :  झारखंड आर्म्ड पुलिस की कमांडेंट और 2010 बैच की आईपीएस ऑफिसर कुसुम पुनिया को केंद्र सरकार ने सेवा से बर्खास्त कर दिया था। स्विमिंग एग्जाम पास नहीं करने के कारण सरकार ने यह कार्रवाई की थी। हालांकि बाद में सरकार ने इनकी सेवा को रिस्टोर कर दिया।

कुसुम झारखंड कैडर की आईपीएस हैं और इन दिनों जैप की कमांडेंट हैं। जैप में मां की पूजा बेहद अनोखे ढंग से की जाती है। पूजा में जैप के सभी ऑफिसर्स मौजूद रहते हैं। कुसुम पुनिया भी पूजा के पहले दिन से ही लगातार यहां पूजा में लीन हैं। झारखंड कैडर की 2010 बैच की आईपीएस अधिकारी कुसुम पुनिया को पिछले साल जून में बर्खास्त किया था।

कुसुम प्रोबेशन पीरियड में थी। कुसुम पुनिया जामताड़ा जिले की एसपी रह चुकी हैं। बर्खास्तगी के समय वे एंटी करप्शन ब्यूरो में एसपी थीं। ट्रेनिंग के दौरान उनकी गढ़वा जिले में भी पोस्टिंग रही थी। कुसुम को कई बार नाेटिस और चेतावनी दी गई थी, लेकिन उसके बाद भी पुनिया ने आईपीएस ट्रेनिंग का स्वीमिंग वाला हिस्सा पूरा नहीं किया। इसके बाद ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह कार्रवाई की थी।

कुसुम पुनिया राजस्थान के चुरू जिले की राजगढ़ तहसील के सरदारपुरा की रहने वाली हैं। बेहद संघर्षों का सामना करके कुसुम आईपीएस बनीं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति उन दिनों बहुत अच्छी नहीं थी। कुसुम 2011 बैच के आईपीएस ऑफिसरों के साथ नेशनल पुलिस अकादमी की ट्रेनिंग में शामिल हुई थीं। इसीलिए वह नौकरी पर रहते हुए भी प्रोबेशन पीरियड में रहीं।

नेशनल पुलिस एकेडमी ने कुसुम को कई बार ट्रेनिंग पूरी करने का निर्देश दिया लेकिन वह अनदेखी करती रहीं। इस कारण उनकी सर्विस भी कंफर्म नहीं हो सकी थी। बाद में कुसुम पुनिया ने अपनी खराब सेहत का हवाला दिया था और ट्रेनिंग से छूट की मांग की थी।

हालांकि बाद में इस मांग को रिजेक्ट कर दिया गया। एकेडमी ने इससे पहले मेडिकल बोर्ड का भी गठन किया था, जो कुसुम पुनिया के हेल्थ को जांचता। लेकिन वे बोर्ड के सामने भी नहीं आईं। गृह मंत्रालय के नोटिफकेशन के मुताबिक बर्खास्तगी की छह माह की अवधि कुसुम पुनिया के सर्विस पीरियड में काउंट नहीं होगी।

24 जून 2016 को केंद्र सरकार ने इन्हें बर्खास्त कर दिया था। 10 मार्च को फिर झारखंड सरकार ने इन्हें जैप वन का कमांडेंट बनाया। झारखंड आर्म्ड पुलिस (जैप) में दुर्गापूजा के अवसर पर हथियारों की पूजा की जाती है। यहां बलि प्रदान भी होता है और हर बलि पर मां को गोलियां चलाकर सलामी दी जाती है।

जैप के गोरखा जवान शक्ति के उपासक हैं और मां की पूजा करते हैं। इसी सिलसिले में जवान यहां पहले अपने हथियारों की पूजा करते हैं फिर फायरिंग कर मां को सलामी देते हैं।

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