1100 साल पहले पहाड़ी काट बनाया था ये ऐतिहासिक शिवलिंग, सावन में उमड़ती है भीड़

आस्था

धमतरी शहर के मध्य पोस्ट ऑफिस वार्ड में स्थित है बुढ़ेश्वर महादेव का मंदिर। राजधानी रायपुर से 78 किमी दूर यह मंदिर लगभग 11 सौ साल पुराना है। मंदिर के पुजारी बताते है कि स्वयंभू शिवलिंग के चारों ओर से पहाड़ों को काटकर मंदिर का स्वरूप दिया गया है।

बुढेश्वर मंदिर धमतरी का इतिहास 11 सौ वर्ष पुराना है। मंदिर के पुजारी चिंतामणी त्रिपाठी ने बताया कि यहां का शिवलिंग स्वयंभू है। अर्थात जमीन के अंदर से प्रकट हुआ है। किवंदती है कि पहले यह स्थान घने जंगल से घिरा हुआ था।

पूर्व के राजाओं ने यहां स्थित पहाड़ को काटकर स्वयंभू शिवलिंग के चारों ओर मंदिर का स्वरूप दिया। इस मंदिर में शहर के अलावा दूर-दराज से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सावन मास में यहां श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ता है। रायपुर, जगदलपुर, कोलकाता, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, शहडोल सहित अन्य स्थानों से श्रद्धालु मन्न्त मांगने के लिए यहां पहुंचते हैं।

सैंकड़ों साल पुराने बुढ़ेश्वर मंदिर में प्रतिवर्ष बोलबम कांवरियां संघ द्वारा सामूहिक रूप से प्रत्येक सोमवार को कांवर यात्रा निकाली जाती है। इसके अलावा प्रतिवर्ष यहां पूरे सावन मास में शिवमहापुराण कथा का आयोजन होता है।

मंदिर की प्राचीनता को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट द्वारा लाखों की लागत से इस मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए इस साल सावन मास के प्रथम सोमवार को भूमिपूजन किया गया। मंदिर का जीर्णोंद्धार किया जाएगा।

Source: Nai Dunia

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