भाद्रपद पूर्णिमा शुक्रवार को फल्गु में पिंडदानियों का सैलाब मोक्षदायिनी उमड़ा। मुख्य रूप से त्रिपाक्षिक गया श्राद्ध कर रहे पिंडदानियों ने पितरों के मोक्ष की कामना लिए फल्गु श्राद्ध किया। देवघाट से दूर पूर्वी छोर में बह रही पतली जलधारा में तर्पण कर पिंडदानियों ने अपने पूर्वजों के लिए विष्णुलोक की कामना की। फल्गु में पिंडदानियों की आस्था के साथ-साथ कर्मकांड के मंत्रों की धारा बही। कुछ तीर्थयात्रियों ने पवित्र फल्गु में डुबकी लगाकर पूर्वजों को याद किया। फल्गु में पिंडदान के साथ ही कर्मकांड से गयाधाम गूंजने लगे हैं। विष्णुपद मेला क्षेत्र और अंदर गया की रौनक बढ़ गयी है। गया श्राद्ध के दूसरे दिन शनिवार को तीर्थयात्री प्रेतशिला जाकर पिंडदान करेंगे।  


शुक्रवार की सुबह छह बजे से पिंडदानियों का जत्था फल्गु पहुंचने लगा। आठ बजे तक फल्गु नदी, देवघाट, संगत घाट, गजाधर घाट और विष्णुपद मंदिर में तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ हो गयी। मंडरा रहे बादल के सुहाना मौसम में फल्गु की रेत पर बैठकर हजारों पिंडदानियों ने कर्मकांड किया। फल्गु के तट देवघाट से लेकर विष्णुपद मंदिर कर्मकांड के मंत्रों से दोपहर तक गूंजता रहा। अंत: सलिला में कर्मकांड के बाद तीर्थयात्री विष्णुपद मंदिर पहुंचे। मंदिर के गर्भगृह में विष्णुचरण के दर्शन-पूजन किया। मंदिर में दोपहर तक पिंडदानियों की  भीड़ रही। एक दिन का कर्मकांड करने वालों की भीड़ फल्गु, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट में रही। 

देश के कोने-कोने से तीर्थयात्रियों का गयाधाम आना जारी है। शुक्रवार तक देश के विभिन्न प्रांतों से करीब 30 हजार से अधिक पिंडदानियों के आने की सूचना है। पिछले साल की तुलना में इस बार पिंडदानी कम दिख रहे हैं। श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के सचिव व गयापाल गजाधर लाल पाठक ने कहा कि अब पिंडदानियों की संख्या बढ़ेगी। करीब तीस  हजार से अधिक आ चुके हैं। त्रिपाक्षिक पिंडदान करने वाले तीर्थयात्री आ चुके हैं। गुरुवार को पुनपुन के बाद गयाधाम में पिंडदान कर रहे हैं। पंचमी से यूपी, बंगाल और एमपी के पिंडदानियों की संख्या बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अब एक दिन, तीन दिन, पांच दिन और सात दिन पिंडदान करने वाले पिंडदानी की आवाजाही लगी रहेगी। सबसे ज्यादा एक दिन गयाश्राद्ध करने वाले आएंगे। सबसे ज्यादा भीड़ विष्णुपद मंदिर, गजाधर, देवघाट और संगत घाट पर होगी।

Sources:-Hindustan

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here