जिसे नक्सली समझकर पुलिस ने पकड़ा वह 12 साल से लापता पूर्व फौजी निकला

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पटना: लंबे समय से विक्षिप्त हालत में घूम रहे एक पूर्व फौजी के लिए शुक्रवार का दिन बेहद खास रहा। करीब 12 साल बाद वह अपने परिवार से मिल पाया। दरअसल, पुलिस जिस युवक को नक्सली समझ कर थाने ले आई थी। वह संतोष कुमार (40) सेना की सिग्नल कोर का पूर्व फौजी निकला।

शुक्रवार को उसे लेने पहुंचे उसके भाई सतीश कुमार ने बताया कि उसका भाई सिक्किम में जनरल ड्यूटी पर था, तभी उसकी बाईं आंख खराब हो गई थी, जिसके बाद उसने नौकरी छोड़ दी थी और वह लापता हो गया था। उसकी काफी तलाश की लेकिन उसका पता नहीं चल पाया। इसकी रिपोर्ट भी केरल में थाने में दर्ज कराई थी।

संदिग्ध होने पर पुलिस ने लिया हिरासत में

मोतीनाला थाना प्रभारी पीएस तिलगाम ने बताया कि 3 जुलाई को मोतीनाला से चिल्फी घाटी के बीच नेशनल हाईवे- 30 में एक संदिग्ध युवक के होने की सूचना मिली थी, वह लोगों से हथियारों के बारे में बातचीत कर रहा था। चूंकि यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ सीमा से लगा है और नक्सल प्रभावित है। लिहाजा, पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।

भाषा समझने बुलाया सिस्टर को

पुलिस पूछताछ में टूटी-फूटी भाषा में युवक अपना नाम संतोष केरल निवासी बता पाया। अन्य बातें पुलिस को समझ नहीं आ रही थीं। संतोष ने टूटी-फूटी हिंदी में बताया कि वह आर्मी में सिग्नल कोर में रहा है। साल 2007 में फौज की नौकरी छोड़कर भटक रहा था। पुलिस ने उसकी भाषा को समझने के लिए चर्च से मलयालम भाषा की जानकार सिस्टर मर्सी को बुलाकर बात कराई, जिसमें उसने अपने घर का पता थाना कर्तिकेयपल्ली जिला आलपी केरल का बताया।

व्‍हाट्सएप पर फोटो भेजकर कराई पहचान

थाना प्रभारी पीएस तिलगाम ने कार्तिकेयपल्ली थाने का टेलीफोन नंबर गूगल में सर्च किया। थाने का फोन नंबर लेकर सिस्टर मर्सी से बात कराई और संतोष के बारे में जानकारी दी। इसके बाद छोटे भाई सतीश ने 4 जुलाई को फोन पर बात की और संतोष के लापता होने की जानकारी दी। सतीश के व्‍हाट्सएप में संतोष की फोटो भेजकर पहचान कराई गई। 6 जुलाई को सतीश और मौसेरे भाई सबेरी मोतीनाला थाने पहुंचे और संतोष को देखते ही पहचान लिया।

Source: Nai Dunia

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