माँ की परेशानी नहीं देख सका बेटा, बनाया रोटी मेकर, अब एक घंटे में बन जाती हैं 180 रोटियां

जिंदगी

पटना: कर्नाटक के रहने वाले 41 साल के बोमई के अंदर हमेशा से कुछ नया खोजने की इच्छा रहती थी। उन्होंने कभी साइकिल बनाने की दुकान से अपना सफर शुरू किया था और आज उनके पास लाइसेंस वाली वर्कशॉप है।

हाल में उन्होंने एक ऐसा अनोखा रोटी मेकर ईजाद किया है जो कि पारंपरिक खाना बनाने की विधि से होने वाले प्रदूषण में करीब 80 प्रतिशत की कटौती कर देगा। उन्होंने अपनी मां और गांव की कई अन्य महिलाओं को घरों में रोटी बनाते हुए मुश्किल का सामना करते देखा था। इसीलिए रोटीमेकर बनाने के की सोची और ये उनके लिए फायदे साबित हुई।

बोमई को खुद रोटियां बहुत पसंद हैं। वे अपनी मां को यह कठिन काम करते हमेशा देखते थे। उनकी मां रोटियों को गर्म रखने के लिए अखबार में लपेट दिया करती थीं। यह देख उन्‍हें नए आविष्‍कार का ख्‍याल आया। बोम्‍माई की रोटी मेकर मशीन सौर ऊर्जा और एसी करंट दोनों से चलती है। इसकी लागत 15 हज़ार रुपए आई है। इसे ऑपरेट करना आसान है।

इसका आकार किसी सामान्‍य इंडक्‍शन की तरह ही है और वजन 6 किलो है। एक घंटे में यह मशीन 180 रोटियां बना सकती हैं। बोम्‍माई खुशी से कहते हैं कि अब उनकी मां बहुत खुश हैं और बिना मेहनत के बहुत सारी रोटियां बना सकती हैं।

बोमई चाहते हैं कि इसे बड़े स्तर पर डेवलप किया जाए, लेकिन आर्थिक स्थिति अच्छी न होने की वजह से वे मजबूर हैं।वे कहते हैं कि मेक इन इंडिया अभियान के तहत रोटी मेकर को अच्छे से डेवलप करना चाहता हूं जिससे की ग्रामीण आबादी को लाभ पहुंच सके। लेकिन उसके लिए उन्हें पैसों की जरूरत है। बोमई ने रोटीमेकर के अलावा और भी कई चीजें बनाई हैं जिससे घर का काम आसान हो जाता है।

Source: The Hook

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