फौजी बेटे के लाश से लिपटकर रोने लगे पिता, कहा- बॉर्डर पर मरता तो नहीं होता अफसोस

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पटना :   पटना के दानापुर के मंगलम कॉलोनी में मारे गए सेना के जवान रिंकेश कुमार सिंह का पार्थिव शरीर मंगलवार की दोपहर बाद करीब तीन बजे पैतृक गांव धोबहां लाया गया। लकड़ी के ताबूत में रखा शव राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे से लिपटा हुआ था। जिसे देखकर ग्रामीणों की आंखें भी नाम हो गयी थी।

पिता विजय कुमार सिंह ने रोते हुए कहा कि वे खुद सेना के मेजर से रिटायर्ड हुए थे। अपने बहादुर इकलौते बेटे को देश के दुश्मनों से लड़ने के लिए सेना में भेजा था। अगर बेटा बॉर्डर पर लड़ते हुए मारा जाता तो अफसोस नहीं होता। दुख इस बात का है कि बुजदिल दोस्त ने ही रिंकेश की जान ले ली। उन्होंने सेना व पुलिस अफसरों से इस कांड की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की। भोजपुर जिला मुख्यालय से करीब दस किलोमीटर दूर आरा-सलेमपुर मार्ग पर धोबहां गांव अवस्थित है। मारा गया फौजी रिंकेश सिंह मां-बाप का इकलौता बेटा था। वह वर्ष 2014 में सेना में बहाल हुआ था। वर्तमान में उसकी पोस्टिंग दानापुर में ही थी। विवाह की भी बात चल रही थी। चचेरे भाई बबलू ने शव को मुखाग्नि दी।

मारे गए रिंकेश के मामा उपेन्द्र सिंह ने बताया कि छपरा जिले के मशरक प्रखंड के चकियां निवासी संतोष कुमार उनके भांजे रिंकेश से सीनियर था। उसने रिंकेश को ट्रेनिंग दी थी। संतोष अरुणाचल प्रदेश में कार्यरत था। संतोष इसी साल अप्रैल में भांजी पिंकी की शादी में धोबहां गांव आया था। वह अपनी चचेरी बहन से शादी करने के लिए रिंकेश पर दबाव बना रहा था। एक बार रिंकेश के पिता से भी उसने बात की थी। मारे गए रिंकेश के पिता रिटायर्ड फौजी विजय कुमार सिंह ने कहा कि रविवार को संतोष उनके बेटे को गाड़ी पर बैठाकर आर्मी कैंप से अपने आवास पर ले गया था। संतोष के साथ कुछ और लोग भी थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर रिंकेश को गोली मारे जाने के बाद संतोष खुद को गोली मारता तो कमरे में बाहर से छिटकनी कैसे लगी रहती?

आशंका जतायी कि संतोष ने अन्य लोगों के साथ मिलकर इस घटना की साजिश रची होगी। बाद में राज नहीं खुल जाए इसलिए उन लोगों ने रिंकेश की हत्या के बाद संतोष को भी मार डाला। जिससे मामला दो लोगों के बीच ही सिमट कर रह जाए। पैक्स अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि पुलिस को गंभीरता से इस केस की जांच करनी चाहिए। जिससे सच्चाई सामने आ सके।

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