एम्स के डॉक्टर ने अश्विनी चौबे को खुला खत लिख दिया जवाब, पढ़ सौ बार सोचेंगे….

राजनीति

पटना: बिहार के बक्सर से बीजेपी के सांसद व केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे के बिहार के लोगों पर एम्स में भीड़ को लेकर दिए गए बयान पर राजनीति जारी है इसी बीच एम्स के डॉक्टर उनके बयान से सहमत नहीं हैं और मंत्री को खुला ख़त लिखकर जवाब दिया है. ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रोफेसर डॉ शाह आलम खान ने मंत्री के नाम बाकायदा खुला खत लिखकर जवाब दिया है.

डॉ शाह आलम खान ने मंत्री को खुला खत लिखते हुए कहा है कि इन हालात के लिए मरीज़ नहीं, उन राज्यों की लचर स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था ज़िम्मेदार है, जहां से वे आ रहे हैं. इसके अलावे एम्स के कुछ और डाक्टरों ने भी यही सवाल उठाया है कि जब मंत्रियों के परिवार वाले किसी भी बीमारी का इलाज करवाने के लिए दिल्ली आ सकते हैं, तो बाकी मरीज़ क्यों नहीं.

डॉ शाह आलम खान ने मंत्री के नाम बाकायदा खुला खत लिखकर कहा, “उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ से आने वाले मरीज़ समस्या नहीं हैं… ऐसे हालात दरअसल देश में हेल्थकेयर की लचर व्यवस्था की देन हैं… गरीब आमतौर पर समझदार होते हैं, और झुंड में भी वे उसी जगह जाते हैं, जहां उनका भरोसा होता है, उन्हें ऐसा करने से मत रोकिए…”

डॉ शाह आलम खान ने कहा कि, “डॉक्टर होने के नाते हम क्षेत्र, जाति, धर्म, पंथ, लिंग, सामाजिक स्तर और राष्ट्रीयता के आधार पर किसी का इलाज करने से इंकार नहीं कर सकते… ऐसा करना न सिर्फ नैतिक तौर पर गलत है, बल्कि गैरकानूनी भी है. कृपया एम्स या फिर देश के किसी भी डॉक्टर को किसी खास समुदाय का इलाज नहीं करने की सलाह न दें.. और आपकी सलाह नहीं मानने वाले डॉक्टर नैतिक और कानूनी तौर पर सही हैं, क्योंकि अगर बिहार से आने वाले मरीज़ की बीमारी छोटी भी है, तो उनकी सोच मायने रखती है, क्योंकि यह मरीज़ों का अधिकार है कि वे खुद को कितना बीमार मानते हैं…”

डॉ शाह आलम खान के अलावे अन्य डॉक्टरों को भी मंत्री का बयान पसंद नहीं आया. सीनियर रेजिडेंट डॉ हरजीत भट्टी ने बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में एम्स तो बहुत खोले गए हैं, लेकिन क्या वाकई दिल्ली के एम्स जैसी सुविधाएं कहीं और हैं? डॉ भट्टी ने कहा, मंत्री बयान तो दे सकते हैं, लेकिन बिना जांच किए यह नहीं कह सकते कि कौन-सी बीमारी बड़ी है और कौन-सी छोटी. एक अन्य सीनियर रेजिडेंट विजय कुमार ने मंत्री पर तंज करते हुए सवाल किया कि, “जब मंत्रियों और अफसरों के बच्चे छोटी-छोटी बीमारियों के लिए अगर सीधे एम्स आ सकते हैं, तो फिर बिहार के बाकी लोग क्यों नहीं…?

गौरतलब है कि केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने कहा था, “चार-चार, पांच-पांच लोग मामूली बीमारी वाले एक मरीज को लिए एम्स आ जाते हैं, और फिर सिफारिश लगवाते हैं… क्या यह ठीक है…?” मंत्री ने कहा था कि, “मैंने एम्स के निदेशक को निर्देश दिया है कि कोई मरीज़ अगर ऐसी बीमारी के साथ एम्स आता है, जिसका इलाज उसी के राज्य में मुमकिन है, तो उसे फिर वहीं रेफर कर दीजिए.” मंत्री अश्विनी चौबे के बयान पर बिहार में खूब हंगामा हुआ विपक्ष ने बयान पर माफी मांगने की बात कही और मंत्री इस इस्तीफे की मांग भी की है.

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