भोलेनाथ के भक्तों की यहां खुद गणेश जी करते हैं रक्षा, कभी पांडवों ने भी की थी यहां पूजा

आस्था

पटना : देहरादून के इस मंदिर के विषय से जुड़ी एक मान्यता प्रसिद्ध है। कहते हैं कि यहां पर शिव के ह्रदय और बांहों की पूजा होती है। इस मंदिर की पूजा का दायित्व यहीं के एक स्थानीय व्यक्ति को दिया जाता है।

इस मंदिर में तीर्थयात्री हजारों की संख्या में प्रत्येक वर्ष पहुंचते है। इस स्थान से एक अन्य कथा जुडी हुई है, कि भगवान राम से रावण का वध करने के बद ब्रह्महत्या शाप से मुक्ति पाने के लिये उन्होंने यहां पर शिव की तपस्या की थी।

तभी से इस स्थान का नाम चंद्रशिला भी प्रसिद्ध है। यहां से बद्रीनाथ, नीलकंठ, पंचचूली, सप्तचूली, बंदरपूंछ, हाथी पर्वत, गंगोत्री व यमनोत्री के दर्शन भी होते है।

तुंगनाथ मंदिर अपने धार्मिक महत्व के साथ साथ अपने प्राकृ्तिक सौन्दर्य के लिए भी विख्यात है। यहां की यात्रा का कुछ मार्ग जंगलों से होकर तय करना पडता है।

ताजी हवा और प्रकृ्ति के स्वयं को निकट देखना, एक अलग तरह का अनुभव कराता है। भगवान भोलेनाथ का ऐसा मंदिर जहां रास्ते में श्रद्धालुओं को गणेश मिलते हैं। गणेश पूरे रास्ते भर उनकी रक्षा करते हैं, ताकि मंदिर तक पहुंचने में कोई विघ्न न हो।

हम बात कर रहे हैं, भारत के उतराखंड राज्य में तुंगनाथ मंदिर की। तुंगनाथ मंदिर के विषय में एक प्राचीन पौराणिक कथाप्रचलित है। कथा महाभारत के मुख्य पात्रों से संबन्धित है। कथा के अनुसार जब पांच पांडवों पर अपने परिवार के भाईयों की हत्या का आरोप लगा।

अपने भाईयों की हत्या के पाप से मुक्ति के लिए पांडवों ने इन स्थानों में प्रत्येक मंदिर में पांच केदार का निर्माण किया। तुंगनाथ मंदिर को चोटियों का स्वामी कहा जाता है।

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