बच्चों के लिए छोड़ दी थी 1.2 करोड़ की जॉब, इस लेडी की अंबानी भी करते हैं तारीफ गरीब

कही-सुनी

पटना: राजधानी लखनऊ में गरीब बच्चों को फ्री एजुकेशन प्रोवाइड कराने की जंग लड़ने वाली समीना बानो ने विदेश की 1.2 करोड़ रुपए पैकेज की जॉब छोड़ दी थी। उन्होंने करीब 5 हजार प्राइवेट स्कूलों में 52 हजार से अधिक गरीब बच्चों को आरटीई के अंतर्गत फ्री में एडमिशन भी दिलाया। आज भी समीना गरीब बच्चों के हक की लड़ाई लड़ रही हैं।

समीना बानो बताती हैं, उनका जन्म 5 अगस्त 1983 को हुआ था। पिता के एयरफोर्स में होने के कारण उनका एक जगह से दूसरे जगह ट्रांसफर होता रहता था। घर में पढ़ाई को लेकर परिवार के लोगों में ज्यादा सीरियसनेस नहीं थी। पिता के बार-बार ट्रांसफर के चलते वो किसी भी स्कूल में लंबे टाइम तक नहीं पढ़ पाईं।

12th की पढ़ाई पूरी करने के बाद गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ पुणे से इंजीनियरिंग कंप्लीट किया। इसके बाद आईआईएम बैंगलुरु से मास्टर्स की डिग्री लेने के बाद जॉब की तलाश में अमेरिका चली गईं। वो कहती हैं- ”अमेरिका की एक कंसल्टेंसी कंपनी में 1 करोड़ 2 लाख सलाना के पैकेज पर मैनेजर की जॉब ऑफर मिला था। इसके कुछ दिन बाद ही सिंगापुर की एक कंपनी में सेम जॉब का ऑफर मिला।

लेकिन वहां के हालात देखकर मेरे मन में वहां काम करने की इच्छा नहीं हुई। मैंने दोनों जगहों के जॉब ऑफर को ठुकरा दिया।” “अमेरिका से हॉयर स्टडीज की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2012 में वापस इंडिया चली आई, यहां आकर देखा कि आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन ठप पड़ा था। कई गरीब पैरेंट्स अपने बच्चों का प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन नहीं करा पा रहे थे। उसी टाइम मैंने गरीब बच्चों को फ्री में स्कूलों में एडमिशन दिलाने का डिसीजन लिया और इस काम की तैयारियों में जुट गई।”

“बच्चों को स्कूलों में एडमिशन दिलाने के लिए 2012 में ‘भारत अभ्युकदय फाउंडेशन’नाम का एक एनजीओ खोला। इस संस्था। का उद्देश्यब गरीब बच्चों को राइट टू एजूकेशन के तहत अच्छे स्कूतलों में दाखिला दिलाना था। मैंने खुद से उस एनजीओ में कुछ लोगों को अपने साथ जोड़ा। शुरुआत में आरटीई के तहत बच्चों को एडमिशन देने में प्राइवेट स्कूल अड़ंगा लगाते थे। लेकिन मैंने हार नहीं मानी और अपने काम को जारी रखा।”

“इसके बाद 2013 में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में बच्चोंग की सर्वाधिक संख्या का दावा करने वाले सीएमएस स्कूोल से सीधी टक्कर हुई। सीएमएस की इंदिरा नगर शाखा ने 6 अप्रैल 2015 को 31 बच्चों के एडमिशन लेने से मना कर दिया था। इसको लेकर समीना ने स्कूकल के सामने से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी, जिसमें सीएमएस को 28 सितबंर 2015 को बच्चों के एडमिशन लेने पर मजबूर होना पड़ा।”

“2013 में आरटीई के तहत 54 हजार गरीब बच्चों का यूपी के स्कूलों में एडमिशन हुआ था। प्राइवेट स्कूोल उनके लिए रिजर्व 25 परसेंट सीटों पर भी एडमिशन देने में आनाकानी करते थे। इसके बाद उन्होंसने एक लंबी लड़ाई लड़ी, कोर्ट केस भी झेले। 2015-16 में प्रदेश भर में गरीब बच्चों के लिए रिजर्व 6 लाख सीटों पर 4600 के रिकॉर्ड एडमिशन करवाए। 2016- 17 में भी ये आंकड़ा 52 हजार के आस-पास पहुंच गया है।”

“समीना ने यूपी सरकार की मदद से आरटीई एक्ट में ऐतिहासिक चेंज करवाया गया। पहले आरटीआई के तहत अगर बच्चेी के घर के एक किलोमीटर के दायरे में सरकारी स्कूईल है तो उसे निजी स्कूयल में एडटमिशन नहीं मिल सकता था। इस नियम को सरकार की मदद से खत्म करवाया और इस पाबंदी को हटवाया। इससे रिकॉर्ड संख्याट में गरीब बच्चोंा को बड़े स्कूडलों के बच्चोंब के साथ पढ़ने का मौका मिला।”

“पिछले साल एक एजूकेशनल इवेंट में हिस्सा लेने गई थीं, जिसकी गेस्ट सीएम की पत्नी सांसद डिंपल यादव थीं। इसमें आरटीआई के दवारा उनकी कोशिश से एडमिशन पाए नन्हेंं बच्चे भी मौजूद थे। सृष्टि नाम की एक बच्चीस को स्पींच देनी थी। पूरी स्पी च उसने इनका हाथ पकड़े-पकड़े दी। ये देखकर सांसद डिंपल यादव ने कहा- ‘एक पल के लिए ऐसा लगा कि आप ही इस बच्चीी की मां हैं।’ यह सुनकर लगा कि मेहनत सफल हो गई है।”

यूपी के एक्स सीएम आखिलेश यादव से लेकर डिंपल यादव, रिलायंस कंपनी के मालिक मुकेश अंबानी और बालीवुड एक्टर आमिर खान ने भी समीना के काम की तारीफ की है। समीना को मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान मुकेश अंबानी ने खुद अपने हाथों से डिग्री दिया था। उस टाइम मुकेश अम्बानी ने अच्छे मार्क्स से पास होने पर समीना को हौसला आफजाई भी किया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published.