बंगाल प्रशासन ने लगाई रोक,इस बार बंगाल में बिहारी नहीं मना पाएंगे छठ महापर्व

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पटना: दरअसल, एनजीटी के निर्देश पर महानंदा नदी को प्रदूषणमुक्त कराने के लिए दार्जिलिंग की जिला अधिकारी जयसी दासगुप्ता ने सिलीगुड़ी में एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। इसी बैठक में महानंदा नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किये गये और कई प्रकार के निर्णय भी लिये गये।

जयसी दासगुप्ता ने कहा कि इस साल नदी के भीतर कोई घाट नहीं बनाने दिया जायेगा। नदी किनारे से तीन फीट दूर घाट बनाने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही दर्शनार्थियों तथा छठव्रतियों के लिए किसी भी प्रकार के अस्थायी पुल के निर्माण पर भी रोक लगा दी गयी है। डीएम के इसी निर्देश के बाद सिलीगुड़ी के हिंदीभाषी समाज में उबाल है। विभिन्न संगठनों ने डीएम के इस फरमान को नहीं मानने का एलान किया है। इसके अलावा सिलीगुड़ी की विभिन्न छठ पूजा कमेटियां भी लामबंद हो गयी हैं। बिहारी युवा चेतना समिति के अध्यक्ष मिथिलेश मिश्रा ने जिला प्रशासन के इस नये निर्देश का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि छठ व्रत आस्था का पर्व है।

नदी के तट पर सदियों से छठ पूजा किये जाने की परंपरा रही है। अब सिलीगुड़ी में कोई यदि इस परंपरा पर रोक लगाने की कोशिश करे, तो वो लोग इसे नहीं मानेंगे। श्री मिश्रा ने इसके साथ ही इसके साथ ही नदी प्रदूषण को रोकने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि नदियों में प्रदूषण नहीं होनी चाहिए। इसका वह समर्थन करते हैं। उनके संगठन की ओर से ही महानंदा नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। उन्होंने कहा कि छठ पूजा में नदी प्रदूषण जैसी कोई बात नहीं होती है। अगर घाट बनाने तथा घाट आदि के सजावट से प्रदूषण जैसी कोई बात होती भी है, तो इसका निपटारा होना चाहिए।

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छठ पूजा के 48 घंटे के अंदर वह नदियों की साफ-सफाई की व्यवस्था करेंगे। श्री मिश्रा ने आगे कहा कि वह शीघ्र ही सिलीगुड़ी में विभिन्न छठ पूजा समितियों को लेकर एक बैठक करेंगे और उस पर आगे की रणनीति पर विचार करेंगे। बिहारी कल्याण मंच ने भी प्रशासन के इस नये निर्देश को मानने से इनकार कर दिया है। संगठन के अध्यक्ष गणेश त्रिपाठी ने कहा कि कोर्ट के किसी भी निर्देश का वह सम्मान करते हैं और उसका पालन होना चाहिए। लेकिन कोर्ट के आदेश की आड़ में प्रशासन की मनमानी नहीं चलेगी। उन्होंने भी कहा कि वह विभिन्न छठपूजा कमेटियों के साथ जुड़े हुए हैं और प्रशासन के इस निर्देश पर बैठक कर आगे की रणनीति पर विचार करेंगे।

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दूसरी तरफ मां संतोषी छठपूजा आयोजन समिति ने भी डीएम के इस फरमान पर सवालिया निशान लगाया है। उसने कहा है कि छठ पूजा के समय प्रदूषण नहीं, बल्कि पूरे नदी की साफ-सफाई हो जाती है। यदि प्रशासन को महानंदा नदी को प्रदूषण मुक्त करना ही है तो सिर्फ एक दिन छठ पूजा के मौके पर ही नहीं, बल्कि साल के पूरे 365 दिन कार्रवाई करनी चाहिए।

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