कपड़ा व्यवसायी के बेटे ने BPSC में मारी बाजी, सब रजिस्ट्रार बनने की खुशी में जश्न का माहौल

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Patna: बिहार लोक सेवा आयोग 65वीं का फाइनल रिजल्ट जारी हो गया है. सिविल सेवा परीक्षा में कुल 1142 उम्मीदवारों ने इंटरव्यू में भाग लिया था, जिनमें 422 को सफलता मिली है. जिसमें बगहा के आशीष अग्रवाल ने (Asish Agrawal) ने 11वां रैंक लाया है. वहीं, इस परीक्षा में गौरव सिंह टॉपर बने हैं, चंदा भारती को दूसरा स्थानमिला है, वहीं तीसरे स्थान पर सुमित कुमार ने कब्जा जमाया है. अविनाश कुमार सिंह चौथे स्थान पर और आदित्य श्रीवास्तव पांचवें स्थान पर रहे हैं.

बगहा के व्यवसायी पुत्र आशीष अग्रवाल ने बीपीएससी की परीक्षा में 11वां रैंक आया है. लिहाजा पुत्र के सब रजिस्ट्रार बनने को ले परिवार में जश्न का माहौल है. स्थानीय लोग भी आशीष के इस सफलता से फुले नहीं समा रहे हैं. बता दें कि आशीष कुमार अग्रवाल के पिता मनोज अग्रवाल एक कपड़ा व्यवसायी हैं. आशीष ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई डीएम एकेडमी से की और इंटरमीडिएट की पढ़ाई मॉडर्न पब्लिक स्कूल दिल्ली से विज्ञान विषय से पूरा किया. जैसे ही बीपीएससी परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी हुआ आशीष के घर में खुशी का ठिकाना नहीं रहा. पिता और चाचा दुकान पर ही बैठे थे और यह खबर सुनते ही खुशी से उछल पड़े, तत्काल दुकान पर मिठाई मंगा ग्राहकों का मुंह मीठा कराने लगे हैं.

बता दें कि 65वीं BPSC में 14 विभागों में 423 पदों पर नियुक्ति की जानी है. इस साल सबसे अधिक ग्रामीण विकास पदाधिकारी के 110, बिहार शिक्षा सेवा के 72, डीएसपी के 62 पद हैं. जिनकी नियुक्ति को लेकर रिजल्ट जारी कर दिया गया है. दरअसल, प्रारंभिक परीक्षा के लिए 4 लाख 11 हजार 470 अभ्यर्थियों ने फॉर्म भरा था. 6 मार्च 2021 को प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम आए थे. जिसके बाद 25 नवंबर से 28 नवंबर के बीच लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी. प्रारंभिक परीक्षा में 6 हजार 517 अभ्यर्थी सफल हुए थे.

वहीं, प्रारंभिक परीक्षा के बाद मुख्य लिखित परीक्षा के परिणाम 30 जून 2021 को घोषित हुए. जिसके बाद मुख्य परीक्षा में कुल 1142 अभ्यर्थी सफल हुए. इसके बाद साक्षात्कार प्रक्रिया शुरू की गई थी. बता दें कि आयोग की ओर से इसके लिए साक्षात्कार प्रक्रिया सितंबर महीने के पहले सप्ताह में ही खत्म किया जा चुका है. इस प्रक्रिया में करीब दर्जनभप अभ्यर्थियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी. जिसके बाद आयोग ने सभी को मेडिकल जांच कराने का फैसला लिया था.

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