मां की ज्योत को बुझाने में नाकाम रहा था सम्राट अकबर, फिर..

आस्था

मां ज्वाला शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठों में एक प्रमुख शक्तिपीठ है, कहते हैं यहां पर माता सती की जीभ गिरी थी। यहां कि देवी मां अंबिका और अनमाता भैरव के रूप में भगवान शिव हैं।

यहां की नौ ज्वालाओं का नाम देवी के नाम पर रखे गए हैं। इनके नाम इस प्रकार है महाकाली, मां अन्नपूर्णा, मां चंडी, मां हिंगलाज, विन्ध्यवासिनी, महालक्ष्मी, महा सरस्वती, मां अम्बिका और अंजना देवी।

 

ज्वाला मंदिर का रहष्य
इस मंदिर में लगातार किसी भी ईंधन, तेल या घी की सहायता के बिना एक चट्टान से निकलती ये ज्वालाएं देखी जा सकती है।
51 शक्तिपीठों में एक प्रमुख शक्तिपीठ मां ज्वाला को माना जाता है, शक्तिपीठ उस स्थान को कहते हैं जहां पर भगवान विष्णु के चक्र से कटकर माता सती के अंग गिरे थे।
माना जाता है कि जो भी भक्त यहां पर माता को नारियल चढ़ाता है उसकी मनोकामना जरुर पूर्ण होती है।
इस मंदिर को राजा भूमि चंद ने बनवाना शुरु किया था, उसके बाद इसे महराजा रणजीत सिंह और राजा संसारचंद ने पूर्ण रुप से बनवाया था।
यहां पर धरती से नौ अलग-अलग जगहों से ज्वाला निकलती है|
जिसके उपर ही मंदिर का निर्माण करवाया गया है। यहां पर मान्यताएं है कि सम्राट अकबर ने अपने समय में यहां पर जल रही ज्योत को बुझाने के प्रयास किया था, लेकिन हर बार असफल रहा।

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