छेना के ऊपर शुद्ध खोए की मोटी परत और फिर उस पर लिपटा पोस्ता दाना यानि तीन स्तरों पर निर्मित इस मिष्टान्न रसकदम के अद्भुत स्वाद ने न जाने कितने जीभों को जीवंत किया है. बंगाली मूल की इस मिठाई में बिहारी स्वाद समस्तीपुर जिले के कस्बे दलसिंहसराय ने ही घोला है. इस कस्बे में रसकदम कई दुकानों पर सजे मिल जाएंगे. रसकदम का विशुद्ध अनुभव यदि आपने एक बार चख लिया तो समझिए रसकदम को देखकर खुद को रोक नहीं पाएंगे.

आपके मुंह से पानी आने लगेगा. इसे खीर कदम और खोया कदम भी कहते हैं. दलसिंहसराय के रजनीश प्रकाश जो भंसा घर नामक ब्लॉग भी लिखते हैं वे कहते हैं कि रस कदम दलसिंहसराय की खासियत है. काम के सिलसिले में खूब घूमना हुआ है, लेकिन रसकदम की उपस्थिति को कहीं और दर्ज कर पाने में असफल ही रहा हूं. जिस प्रकार तिरुपति के लड्डू, धारवाड़ का पेडा और हैदराबादी हलीम की तरह दलसिंहसराय के रस कदम का ज्योग्राफिकल इंडिकेशन के रुप में पंजीकृत होने का प्रॉपर हक बनता है.

ऐसे बनता है रसकदम:
रसकदम बनाने के लिए सबसे पहले छैना बनाया जाता है. कॉर्न फ्लोर और पीला रंग डालने के बाद कुकर में चीनी और 2 कप पानी डालकर उबलने के लिए रख दीजिए, चीनी को पानी में घुलने तक पका लीजिये, चाशनी में केसर के धागे डाल दीजिये और चाशनी में उबाल आने दीजिये. पास्ता दाना को भून लीजिए.दाना ड्राई होकर हल्का ब्राउन हो जाए तो मावा में पाउडर चीनी डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लीजिए.

अब मावा से लड्डू के आकार के लगभग 11 छोटे-छोटे गोले तोड़ लीजिए. एक गोले को उठा कर इसको चपटा करके बढा़ थोड़ा बड़ा कर लीजिये. फिर इसमें एक रसगुल्ला रखकर चारों ओर खोया से बंद करके गोल लड्डू का आकार दे दीजिए. इस गोले को भूने पोश्ता दाने में लपेट कर थाली में रख दीजिए सारे रसकदम इसी तरह बनाकर तैयार कर लीजिए. रसकदम को 1 घंटे के लिए फ्रिज में रख कर उसके बाद सर्व कीजिए. रसकदम फ्रिज में रखकर 3-4 दिन तक खाये जा सकते है.

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