यदि आप मोमोज पसंद करते हैं तो आपको झारखंड, बंगाल और ओडीसा में बनाया जाने वाला चावल का नमकीन पिठ्ठा भी पसंद आयेगा.  यह भाप से पका हुआ कम तेल से बना बहुत ही स्वादिष्ट खाना है.  चावल के नमकीन पिठ्ठा को सुबह के नाश्ते या शाम की कम भूख  और  लन्च –  डिनर में भी खाया जा सकता है..

पीठे का बिहार में भी वर्चस्व कम नहीं है, लगभग हर बिहारी चावल के पीठे से वाकिफ है वह बहुत चाव से खाते हैं । सादे चावल से भाप में पका पिठ्ठा स्वाद के साथ स्वास्थ्य में भी भरपूर हैं।

पिठ्ठा का इतिहास इसी की तरह दिलचस्प है, आपको बताते चले कि, पिठ्ठा का जन्मदाता के रूप में झारखंड जाना जाता रहा है ।
इसके इतिहास से जुड़ीं एक बहुत प्रचलित कहानी है जिसमें बताया गया है कि
झारखंड में प्रचलित लोक कथा के मुताबिक टुसू मनी का जन्म पूर्वी भारत के एक कुर्मी किसान परिवार में हुआ था। झारखंड की सीमा के नजदीक उड़ीसा के मयूरभंज की रहने वाली दीनी टुसू मनी की खूबसूरती के चर्चे हर तरफ थे। 18वीं सदी में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के कुछ सैनिक भी उसकी खूबसूरती के दीवाने थे। एक दिन उन्होंने गलत नियत से टुसू मनी का अपहरण कर लिया। जैसे ही यह खबर नवाब सिराजुद्दौला को मिली,  तो उन्होंने इस घटना के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की और सैनिकों को सजा देने के साथ ही टुसू मनी को सम्मान के साथ वापस घर भेज दिया। घर वापस जाने पर तात्कालीन रूढ़ीवादी समाज ने टुसू मनी की पवित्रता पर प्रश्नचिन्ह लगाकर उसे स्वीकारने से मना कर दिया। इस घटना से दुखी टुसू मनी ने स्थानीय दामोदर नदी में जान देकर अपनी पवित्रता का प्रमाण दिया। जिस दिन टुसू मनी ने अपनी जान दी, उस दिन मकर संक्राति थी। इस घटना ने पूरे कुर्मी समाज खासकर महिलाओं और लड़कियों को उद्वेलित कर दिया। तभी से कुर्मी समाज अपनी बेटी के बलिदान की याद में टुसू पर्व मनाता अा रहा है। आज झारखंड के आदिवासियों के साथ ही अन्य जनजाति के अलावा क्षेत्र के अन्य लोग भी मना रहे हैं। 

टुसू पर्व के रुप में मनाते हैं मकर संक्रांति

सूर्य के उत्तरायण यानी सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश शुभ माना जाता है। इसी दौरान दिन बड़े होने लगते हैं और प्रमुख पर्व के रुप में मकर संक्रांति का त्यौहार मनाया जाता है। मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। इसी क्रम में झारखंड में मकर संक्रांति को टुसू पर्व या मकर पर्व के नाम से मनाया जाता है। खेतों में तैयार हुर्इ नर्इ फसल के स्वागत में जब भारतवर्ष के अधिकांश लोग मकर सक्रांति का त्यौहार मनाते है तब जंगलों और पहाड़ों के राज्य झारखण्ड के ग्रामीण, आदिवासी अपनी बेटी टुसू मनी के बलिदान की याद में राज्य का पारंपरिक त्यौहार टुसू मनाते हैं। यह मुख्य रूप से झारखंड का त्यौहार है, लेकिन उड़ीसा और बंगाल में भी इसकी धूम होती है। 

ऐसे मनाते हैं टुसू पर्व

झारखंड खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में मकर संक्रांति से करीब एक माह पहले पौष माह से ही टुसू मनी की मिट्टी की मूर्ति बना कर उसकी पूजा शुरू हो जाती है। मकर संक्रांति के दिन इस पर्व का समापन मूर्ति को स्थानीय नदी में प्रवाहित कर किया जाता है। इस दौरान टुसू और चौड़ल (एक पारंपरिक मंडप) सजाने का काम भी होता है। इस काम को केवल कुंवारी लड़कियां ही करती हैं। विसर्जन के लिए नदी पर ले जाने के दौरान स्थानीय लोग टुसू के पारंपरिक गीत गाते और नाचते हुए चलते हैं।

अगर आप भी यह लज़ीज़ व्यंजन घर पर बनाना एव परिवार वालों को खिलाना चाहतें हैं तो यह रहा इस व्यंजन को बनाने की विधि

आवश्यक सामग्री –

चावल का आटा – 1 कप

आलू – 1 ( छोटे टुकड़े में कटा हुआ )

गाजर – 1( छोटे टुकड़े में कटी हुई )

हरी मटर के दाने – आधा कप

तेल – 2- 3 टेबल स्पून

जीरा – 1/4 छोटी चम्मच

हींग – 1 पिंच

अदरक – 1 इंच टुकड़ा (कद्दूकस किया हुआ)

हरी मिर्च – 1( बारीक कटी हुई)

हल्दी पाउडर – 1/4 छोटी चम्मच

धनियां पाउडर – आधा छोटी चम्मच

लाल मिर्च – 2 पिंच

नमक – आधा छोटी चम्मच (स्वादानुसार)

अमचूर – 1/4 छोटी चम्मच

गरम मसाला – 1/4 छोटी चम्मच

हरा धनियां – 2 टेबल स्पून (बारीक कटा हुआ

विधि –

चावल का पिठ्ठा बनाने के लिये सबसे पहले चावल का आटा गूथ कर तैयार कीजिये. किसी बर्तन में 1 1/4 कप पानी डालकर गरम करने रख दीजिये, चौथाई कप पानी किसी प्याली में अलग निकाल कर रख लीजिये, एक कप उबलते पानी में, गैस धीमी करके, नमक और 2 छोटे चम्मच तेल डाल दीजिये, और अब चावल का आटा डालकर मिला दीजिये, गैस बन्द कर दीजिये. आटे को ढककर 5 मिनिट के लिये रख दीजिये ताकि चावल का आटा नरम हो जाय.

अब आटे को किसी डोगे में डालकर मसल मसल कर, एकदम नरम चापाती जैसा आटा होने तक गूथिये. नरम गुथे आटे को 15-20 मिनिट के लिये ढककर रख दीजिये, ताकि आटा अच्छी तरह फूल कर सैट हो जाय.
जब तक आटा सैट होता है तब तक पिठ्ठा में भरने के लिये सब्जी (फिलिंग )  बना लेते हैं. सब्जी बनाने के लिये कढ़ाई गैस पर रख कर गरम कीजिये, तेल डाल दीजिये और तेल गरम होने के बाद, हींग जीरा डाल दीजिये, जीरा भुनने के बाद हल्दी पाउडर, हरी मिर्च, अदरक डालिये और मसाले को थोड़ा सा भूनिये, धनियां पाउडर डालकर मिलाइये और अब कटे हुये आलू, गाजर, मटर के दाने और नमक, लालमिर्च डाल दीजिये, सारी चीजों को मिलाते हुये, सब्जी को 2 मिनिट भूनिये, 2-3 चमचा पानी डालकर, सब्जी को ढककर धीमी आग पर पकने दीजिये. सब्जी को 5 मिनिट बाद खोलकर चैक कर लीजिये, सब्जी को चमचे से चलाइये और देख लीजिये कि सब्जी में पर्याप्त पानी है, सब्जी को ढककर धीमी आग पर, नरम होने तक पका लीजिये, सब्जी में गरम मसाला, अमचूर पाउडर और हरा धनियां डालकर मिला दीजिये, पिठ्ठा में भरने के लिये सब्जी (फिलिंग) तैयार है.

सब्जी को प्याले में निकाल लेते है और थोड़ा ठंडा होने के बाद पिठ्ठा बनाना शुरू करते हैं. चावल का आटा फूल कर सैट हो गया है. हाथ पर थोड़ा सा तेल लगाकर आटे को थोड़ा और मसल कर नरम कर लेते हैं.
पिठ्ठा पकाने के लिये स्टीमर के नीचे के बर्तन में 2 कप पानी भर कर गरम होने रख दीजिये.

आटे को 10-11 भागों में बांट कर गोल लोइया बना कर तैयार कर लीजिये, एक लोई हाथ में उठाकर, दोनों हाथ की उंगलियों की सहायता से बड़ा कर कटोरी की तरह बना लीजिये, पिठ्ठा के लिये तैयार की गई कटोरी में , 1 1/2 चम्मच सब्जी रखिये और फिलिंग को अच्छी तरह बन्द कर दीजिये, पिठ्ठा को बन्द करते समये ये ध्यान रहे कि वह फटना नहीं चाहिये, पिठ्ठा को गोल करके थाली में लगाकर रख लीजिये, सारे पिठ्ठा इसी तरह भर कर तैयार कर लीजिये.

स्टीमर में भरे पानी में उबाल आने के बाद, जाली के बर्तन में तेल लगाकर पिठ्ठा पकाने के लिये थोड़ी थोड़ी दूर पर लगा दीजिये. पिठ्ठा वाले बर्तन को पानी के बर्तन के ऊपर रख दीजिये ढककर पिठ्ठा को 12 – 14 मिनिट तक पकने दीजिये, और चैक कीजिये, पिठ्ठा पकने पर, उसका कलर पहले की अपेक्षा बदल जाता है और वह चमकीला दिखता है.

चावल के आटे का नमकीन पिठ्ठा तैयार है. पिठ्ठा को प्लेट में निकालिये, हरे धनिये की चटनी, टमाटर की चटनी या टमाटो सॉस के साथ परोसिये और खाइये.

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