बिहार की बेटी तन्वी ने न्यायिक परीक्षा में 40 वीं रैंक हासिल की

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लगन और मेहनत की बदौलत हर मुकाम हासिल किया जा सकता है।दानापुर अनुमंडल के शेरपुर (मनेर)की रहने वाली तन्वी तेजस्विता ने इसे साबित कर दिखाया है। उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित वर्ष 2019 में 30वीं न्यायिक परीक्षा में 40 वीं रैंक हासिल कर सिविल जज बनने का गौरव प्राप्त किया है।अनुमंडल के नामचीन अधिवक्ता और दानापुर बार काउंसिल के वर्तमान अध्यक्ष श्री राजीव रंजन की पुत्री तन्वी ने अपने पहले प्रयास में इस सफलता को प्राप्त किया है।तन्वी की माता सेवानिवृत्त शिक्षिक श्रीमति उषा कुमारी ने बताया कि तन्वी बचपन से तार्किक और खोजी प्रवृति का छात्रा रहा है। इतनी कम उम्र में सफलता से पूरा परिवार को गौरवान्वित है। इधर, परिणाम आने के बाद बधाई देने वालों का तांता लगा है। मूलतः पटना विश्वविद्यालय की छात्रा रही तन्वी ने बी एन कालेज से भौतिकी स्नातक में पूरे विश्वविद्यालय में 7वाँ स्थान प्राप्त किया। पटना सायंस काँलेज से परास्नातक एवं पटना लाँ काँलेज से विधि संकाय से गोल्डमेडलिस्ट रही हैं।

पढ़ाई के साथ साथ तेजस्विता गतिविधियों के दूसरे आयाम पर भी राज्य का नाम रौशन करती आयी हैं। वर्ष 2008 के गणतंत्र दिवस आयोजन में बिहार एवं झारखंड के संयुक्त तात्वाधान की ईकाई का हिस्सा बन राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC)द्वारा राजपथ परेड कर राज्य को गौरान्वित किया है।तन्वी ने बताया मेरी सफलता में माता पिता के साथ भाई विवेक का सबसे बड़ा योगदान है। परीक्षार्थी तो मैं थी ,पर मेरे साथ मेरे भाई ने भी इस परीक्षा को एक तरह से जीया है।मुझे अपने लड़की होने पर गर्व है, मैं हर जन्म में इसी परिवार में जन्म लेना चाहुँगी। मैने लड़की के रुप में वह साबित किया है जो अक्सर लड़के करते हैं।तन्वी का कहना है कि मेरा मानना है, भगवान और भाग्य भी उन्हीं का साथ देते हैं जो खुद अपना साथ देते हैं।

ऐसे परीक्षा में शामिल होने वाले युवाओं से कहा कि जीवन में सफल होने के लिए समय प्रबंधन के साथ इमानदारी से त्रस्त सेल्फ स्टडी करें।इस परीक्षा की तैयारी प्रारंभ करने का श्रेष्ठ समय उसी दिन से प्रारंभ हो जाता है ,जब भविष्य में ऐसी परीक्षा देने का निर्णय लेते हैं। समय प्रबंधन मेरी सफलता का राज है। जिन विषयों पर मेरी पकड़ कम थी उन पर ज्यादा फोकस किया और अभ्यास किया। परीक्षा में सकारात्मक सोच रखना अहम है। टाइम मैनेजमेंट, जनरल स्टडीज पर कमांड और कड़ी मेहनत जरूरी हैं। इस सेवा में आने के बाद मेरी कोशिश होगी कि लोगों को समय से न्याय दिलाऊं। काफी संख्या में केस पेंडिंग पड़े हैं। कोशिश करूंगी कि जो केस फर्स्ट ट्रायल में पूरे हो सकते हैं, उन्हें न्याय मिल जाए।

बताते चलें कि तेजस्विता समाज सेवा और असहायों की मदद अपना ध्येय मानती हैं। परिवार के अन्य सदस्यों में भाई विवेक बहन निवेदिता और बहनोई मनीष तीन सी0ए0 हैं। बहन निवेदिता और बहनोई फिलहाल दक्षिणी अफ्रीका में है। इनसबों ने तेजस्विता के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वह अपनी मेधा के बल पर न्यायिक सेवा के उच्च पद पर जाकर सूबे और देश की सेवा कर नाम रौशन करेगी।

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