अफगानिस्तान में अब फिर से तालिबान का शासन, क्या होगी भारत की रणनीति?

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अफगानिस्तान में अमेरिका समर्थित सरकार के गिर जाने और देश के राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश से भाग जाने के बाद रविवार को तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया. तालिबान ने 9/11 के हमलों के बाद अमेरिका सेना के अफगानिस्तान में आने के 20 साल बाद फिर से देश पर कब्जा कर लिया है. अफगानिस्तान में जब तक अगली सरकार का गठन नहीं हो जाता, तब तक भारत सरकार की ओर से कोई रुख नहीं अपनाया जाएगा. भारत ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति ही बनाए रखेगा.

भारत सरकार के सूत्रों से ये जानकारी मिली है कि अभी अफगानिस्तान में सरकार बनने का इंतजार किया जा रहा है. जिस तरह की सरकार बनेगी, उसी आधार पर भारत आगे अपना रुख तय करेगा. मतलब भारत सरकार अभी वेट एंड वॉच की स्थिति बनाए हुए है.

भारत की नजर इस पर है कि अफगानिस्तान में अब पूर्ण तालिबानी सरकार बनेगी या अभी फिलहाल अंतरिम सरकार ही बनेगी. हालांकि तालिबान के प्रवक्ताओं ने मीडिया से बात करते हुए इस बात के संकेत दिए हैं कि अफगानिस्तान में भारत की ओर से जिन प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, उसमें तालिबान किसी तरह की बाधा नहीं डालेगा.

इससे पहले भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत काबुल में हालात पर लगातार नजर रख रहा है. जयशंकर अमेरिका के चार दिवसीय दौरे के लिए न्यूयॉर्क में हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से अफगानिस्तान में हालिया घटनाक्रम पर चर्चा की. उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार काबुल में सिख और हिंदू समुदाय के नेताओं के लगातार संपर्क में है. जयशंकर ने कहा, “काबुल में हालात के मद्देनजर, यह महत्वपूर्ण है कि हमारे पास वहां भारतीयों के बारे में सटीक जानकारी हो. अपील की जाती है कि सभी संबंधित लोग इस बारे में विदेश मंत्रालय के विशेष अफगानिस्तान प्रकोष्ठ को सूचना मुहैया कराएं.”

 

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