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Sushma Verma : कभी कॉन्स्टेबल बनना सपना था, आज इस क्रिकेटर को सरकार ने सम्मानित कर DSP बनाया

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इस बार महिला क्रिकेट विश्व कप में भारत को जीत हासिल नहीं मिली, लेकिन इस टीम में जीतने के लिए क्रिकेटरों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने Sushma Verma को पांच लाख रुपये का चेक भी सौंपा और उपलब्धियों की तारीफ करते हुए कहा कि वह प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम में लेडी धोनी के नाम से मशहूर विकेटकीपर बल्लेबाज Sushma Verma कभी पुलिस विभाग में सिपाही बनना चाहती थीं। हिमाचल के शिमला जिले में सुन्नी तहसील के एक छोटे से गांव गढेरी में पली-बढ़ीं सुषमा के लिए कॉन्स्टेबल बनना ही सबसे बड़ा सपना हुआ करता था।

इस बार महिला क्रिकेट विश्व कप में भारत को जीत हासिल नहीं मिली, लेकिन इस टीम में जीतने के लिए क्रिकेटरों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। अपने अच्छे प्रदर्शन की बदौलत फाइनल तक का सफर करने वाली टीम की विकेटकीपर सुषमा को हिमाचल के सीएम वीरभद्र सिंह ने डीएसपी पद का ऑफर लैटर सौंपा।




इस मौके पर मुख्यमंत्री ने Sushma Verma को पांच लाख रुपये का चेक भी सौंपा और उपलब्धियों की तारीफ करते हुए कहा कि वह प्रदेश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में नई प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं हैं। सीएम ने काफी देर तक सुषमा से बातचीत की और आगे की योजनाओं के बारे में भी पूछा।

सुषमा ने बताया कि वह बचपन से ही पुलिस की नौकरी करना चाहती थीं, और आज उनका यह सपना भी पूरा हो गया। इस मौके पर उनके पिता भोपाल वर्मा भी उनके साथ मौजूद थे।




सुषमा ने अपनी स्कूली पढ़ाई गांव के ही एक सरकारी स्कूल से पूरी की। उन्होंने 2009 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पोर्टमोर से 12वीं की परीक्षा पास की है। वह क्रिकेट खेलने से पहले वालीबॉल, हैंडबॉल व बैडमिंटन भी खेला करती थीं।

सुषमा को महिला विश्व कप न जीत पाने का मलाल है, लेकिन वह कहती हैं कि अब आगे के विश्व कप जीतने के लिए आगे कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। Sushma Verma ने कहा, ‘हिमाचल में लड़कियों में जोश व कुछ भी करने की हिम्मत है, सिर्फ उन्हें मौका देने की जरूरत है।’  सुषमा ने अपनी स्कूली पढ़ाई गांव के ही एक सरकारी स्कूल से पूरी की।




उन्होंने 2009 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पोर्टमोर से 12वीं की परीक्षा पास की है। वह क्रिकेट खेलने से पहले वालीबॉल, हैंडबॉल व बैडमिंटन भी खेला करती थीं।

17 साल की उम्र में उनके कोच ने उन्हें क्रिकेट खेलने की सलाह दी थी। उस वक्त वह 11वीं कक्षा में पढ़ती थीं। पहले वह तेज गेंदबाजी करती थीं, लेकिन बाद में उन्हें विकेटकीपिंग के लिए चुना गया। वह बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही खेलों से लगाव था। सुषमा ने हैंडबॉल और वॉलीबाल में भी नेशनल लेवल तक खेला है। 2009 में सुषमा को हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से एकैडमी के लिए चुना गया था।




इसके बाद वह 2014 तक यहां ट्रेनिंग करती रहीं। यहां वह हिमाचल की टीम की अगुवाई भी करती थीं। 2015 में उनका चयन भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए हुआ था। आज वह अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रही हैं। सुषमा का कहना है कि इंसान के भीतर कुछ करने की चाहत होनी चाहिए, कठिन परिश्रम, पैशन व अनुशासन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।




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