उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के खिलाफ अपने अभियान की कड़ी में एक और खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव पटना में 750 करोड़ की लागत से बिहार में सबसे बड़ा माॅल ही नहीं बनवा रहे थे बल्कि पहचान गुप्त रखकर वे आयरन का कारोबार भी करते हैं।प्रदेश भाजपा कार्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस में मोदी ने कहा कि तेजस्वी यादव 2012 से जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के झारखंड के पतरातू स्थित स्टील प्लांट के हैंडलिंग एंड स्टोरेज एजेंट का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार करना कोई गुनाह नही है। लेकिन इसे छुपाना गुनाह है। चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामा में उन्होंने इसका कोई जिक्र नहीं किया है।


मोदी ने कहा कि इस व्यापार के लिए तेजस्वी यादव ने 255 डिसमिल जमीन पर बारह फीट ऊंची चाहरदीवारी का निर्माण कराया जिस पर करोड़ों रूपये खर्च हुए। अभी भी इस परिसर में क्रेन और आयरन-स्टील रखा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए तेजस्वी यादव की लारा एंड संस को सड़क मार्ग से लोहा आने पर 500 रूप्ये प्रति टन और रेल मार्ग से आने पर 700 रूपये प्रति टन की दर से हैंडलिंग चार्ज का भुगतान हुआ।

सुशील कुमार मोदी ने सवाल किया कि आखिर तेजस्वी ने आयरन एंड स्टील के जिंदल कंपनी के हैंडलिंग एजेंट के तथ्यों को क्यों छुपाया? चुनाव आयोग को दिए गए संपत्ति के ब्योरे में इस जमीन और कारोबा का उल्लेख क्यों नहीं किया गया? उपमुख्यमंत्री सुशली कुमार मोदी ने कहा कि सबसे रोचक तथ्य यह है कि जिंदल कंपनी के एजेंट के तौर पर तेजस्वी करोड़ों का व्यापार करते रहे लेकिन वैट कि रिर्टन में टर्नओवर शून्य दिखाते रहे। मोदी ने कहा कि जांच में टैक्स चोरी का मामला पकड़ा गया तो सरकार कार्रवाई करेगी।

उन्होंने कहा कि जिस 255 डिसमिल जमीन पर करोड़ों की राशि खर्च कर यार्ड बनाया गया वह तेजस्वी यादव ने कहां से खरीदी या यह कहां से उनके पास आई इसे बताना चाहिए। उन्हें जनता को यह भी बताना चाहिए कि बाइस साल की कम उम्र में डिलाइट मार्केटिंग, एबी एक्सपोर्ट, लारा एंड संस फेयरग्रो जैसी दर्जन भर कंपनियों के वे मालिक कैसे बन गए।

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