राजनीति के गेम चेंजर सुशील मोदी पहली ही नजर में दे बैठे थे दिल, ट्रेन में हुआ था प्यार

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बिहार की राजनीति के गेम चेंजर डिप्टी सीएम सुशील मोदी हमेशा चर्चा में रहे हैं। जितना उनका राजनीतिक करियर चुनौती भरा रहा है ठीक इसी तरह उनकी शादी भी उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं थी।

दरअसल जिस लड़की से सुशील शादी करना चाह रहे थे वो हिंदू क्रिश्चियन थी और यही बात उनके परिवारवालों को मंजूर नहीं थी। जब परिवार में सुशील की शादी की बात चली तो उन्होंने अपने प्यार के बारे में घरवालों को बता दिया।

जैसे ही घरवालों को पता चला की लड़की दूसरे धर्म की है तो उनका पारा सांतवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने इस शादी को नामंजूर कर कर दिया। कुछ दिन बाद माता-पिता बेटे की जिद के आगे झुके और सुशील और केरल की जेसिस जॉर्ज की शादी हो गई।

बात उन दिनों की है जब सुशील ABVP के कार्यकर्ता हुआ करते थे। बात कोई 27-28 साल पहले की है। सुशील मोदी परिषद के काम से केरल के दौरे पर थे। ट्रेन में उनकी जेसिस से मुलाकात हो गयी। इस मुलाकात के बाद दोनों ने एक-दूसरे के साथ शादी करने का फैसला कर लिया।

सुशील मोदी के मित्र कहते हैं इन दोनों के प्यार की खबर जब घर के लोगों को लगी तो उनका पारा सांतवें आसमान पर पहुंच गया। घरवालों ने समझाने की भरसक कोशिश की। लेकिन वो नहीं माने।
मोदी के मित्र कहते हैं कि सुशील पारंपरिक मारवाड़ी परिवार के लड़के थे। वहां पर ऐसी शादी को आसानी से मंजूर किया जाना आसान नहीं था। पर उनके घरवालों को समझाया गया। वे राजी हो गये।

इस प्रकार इन दोनों की 1987 में शादी हुई। इनकी शादी में अटल बिहारी बाजपेयी भी आए थे। इसके बाद सुशील मोदी ने राजनीति को बॉय -बॉय करने का मन बना लिया, लेकिन अटल बिहारी बाजपेयी के कहने पर ही उन्होंने दोबारा राजनीति में आने का मन बना लिया।

सुशील मोदी को शादी के तीन साल बाद ही कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले पटना सेंट्रल में विजय मिली। इस प्रकार वो 1990 के विधानसभा चुनाव जीत कर पहली बार विधानसभा पहुंचे।

इनदोनों के दो बच्चे हैं। बड़ा बेटा उत्कर्ष तथागत इंजीनियरिंग कर रहा है वहीं उनका छोटा बेटा अक्षय अमृतांशु भी कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। शादी के करीब 15 सालों बाद लालू-राबड़ी राज में जेसिस जॉर्ज मोदी भी पटना की एक कॉलेज में लेक्चरर बन गयीं। फिलहाल वो एक महिला कॉलेज की प्राचार्य हैं।

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