सूर्य देव प्रकाश और ज्ञान के प्रतीक है। ज्योतिषी के अनुसार सूर्य नवग्रहों के मुख्य सदस्य हैं और धरती पर सभी प्राणियों के लिए जीवन का प्रमुख स्रोत है। सूर्य के बिना धरती पर जीवन असंभव है, इसीलिए सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता कहा जाता है। सूर्य को सफलता का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण से सूर्य मंत्र के जप का महत्व और भी बढ़ जाता है। सूर्य मंत्रों का जप सफलता, अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति और घर में सुख समृद्धि के लिए मुख्य रूप से किया जाता है।

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प्रातः काल उठकर सर्वप्रथम सूर्य के दर्शन करना बहुत ही शुभ माना जाता है। ज्ञान, सफलता और समृद्धि के साथ-साथ आरोग्य जीवन प्राप्त करने के लिए सूर्य देव के विशेष मंत्र कुछ इस प्रकार से हैं।

सूर्य गायत्री मंत्र

ॐ आदित्याय विद्महे मार्त्तण्डाय धीमहि तन्नः सूर्यः प्रचोदयात् ॥

सूर्य गायत्री मंत्र का जाप प्रात काल के समय नियमित रूप से संपूर्ण ध्यान के साथ करने से मानसिक कष्टों में तुरंत शांति मिलती है। जिस से सादक के शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आत्मबल की प्राप्ति होती है। विचारों और मनोवृति को शुद्ध करने के लिए यह मंत्र बहुत ही उपयोगी है। जो की सफलता हासिल करने के लिए आवश्यक है। ग्रह नक्षत्र में किसी भी प्रकार के दोष को दूर करने के लिए सूर्य गायत्री मंत्र अत्यंत लाभकारी है।सूर्य बीज मंत्र

ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः ॥

रविवार के दिन सूर्य बीज मंत्र का जाप विशेष रूप से लाभकारी होता है। यदि किसी की कुंडली में सूर्य की दशा खराब है, तो सूर्य बीज मंत्र के जप की शुरुआत रविवार के दिन से की जा सकती है। नियमित रूप से 41 दिन तक 6 माला सूर्य बीज मंत्र का जप करने से इच्छित फल प्राप्ति होती है। सूर्य बीज मंत्र के जप से अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। यह मंत्र विशेष रूप से आंखों के रोग, हृदय संबंधी समस्याएं और त्वचा संबंधित समस्याओं से राहत प्रदान करता है। इसी के साथ साथ यह मंत्र मानसिक शांति और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए भी लाभकारी है।

आदित्य हृदय स्तोत्र

सूर्य देव का यह पाठ हिंदू धर्म के सभी शक्तिशाली पाठो में से एक है। स्रोत का नियमित रूप से पाठ करने से संघर्षों के समय में सफलता के मार्ग की प्राप्ति होती है। आदित्य हृदय स्त्रोत विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। जो की बुद्धि और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। ऐसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करता है। वह हर प्रकार के मानसिक कष्टों और शत्रुओं से मुक्ति प्राप्त करता है

रामायण में उल्लेख है कि रावण से युद्ध के दौरान भगवान राम निराशा के शिकार होने लगे थे। उन्हें थकान और नकारात्मकता ने पूरी तरह से घेर लिया था। ऋषि अगस्त्य मुनि को जब इस बात का आभास हुआ तो उन्होंने भगवान राम से आदित्य हृदयम स्तोत्र का पाठ करने की सलाह दी। भगवान राम ने उनके अनुग्रह को स्वीकारा और तीन बार आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ का जाप किया। जिससे उनका आत्मविश्वास पुनः लोट आया। तत्पश्चात उन्होंने रावण से संपूर्ण जोश के साथ युद्ध किया और विजय प्राप्त की।

आदित्य हृदय स्तोत्र का जप करने की विधि

– प्रातकाल सूर्य उदय से पहले उठे।
– नहा धोकर साफ-सुथरे लाल या सफेद कपड़े पहने।
– अब तांबे के लोटे में जल ले और उसमें लाल चंदन या रोली के साथ साथ लाल फूल डालें।
– अब इसे सूर्य देव को चढ़ा दे।
– सूर्य देव के समक्ष साफ आसन बिछाकर उस पर बैठ जाएं।
– सूर्य देव को नमन करते हुए उनका ध्यान करें और 11 बार आदित्य नमः का जप करें।

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