सुपौल- मधुबनी के बीच बन रहा देश का सबसे लंबा पुल, भूटान, बांग्लादेश और नेपाल का भी सफर होगा आसान

जानकारी प्रेरणादायक

देश का सबसे लंबा पुल सुपौल और मधुबनी के बीच बन रहा है। इसका निर्माण सुपौल के बकौर से मधुबनी जिले के भेजा तक किया जा रहा है। निर्माण कार्य केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय करा रहा है। इस पर 984 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पुल की लंबाई 10.2 किलोमीटर है। एप्रोच रोड मिलाकर कुल लंबाई 13.3 किलोमीटर हो जाती है। इसका निर्माण कार्य दो एजेंसी कर रही है। गैमन इंडिया एवं ट्रांस रेल लाइटिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पुल का निर्माण कार्य 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा। बता दें भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बिहार में कई मार्गों का निर्माण चल रहा है। जबकि हाल में कई प्रोजेक्ट को मंजूरी भी मिली है। इस पुल का निर्माण भारत माला पांच पैकेजों के जरिए करा रहा है। इस पुल के निर्माण के बाद सुपौल से मधुबनी की दूरी 30 किलोमीटर कम हो जाएगी। फिलहाल लोगों को मधुबनी जाने के लिए 100 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।

 जबकि हाल में कई प्रोजेक्ट को मंजूरी भी मिली है। इस पुल का निर्माण भारत माला पांच पैकेजों के जरिए करा रहा है। इस पुल के निर्माण के बाद सुपौल से मधुबनी की दूरी 30 किलोमीटर कम हो जाएगी। फिलहाल लोगों को मधुबनी जाने के लिए 100 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इस पुल में कुल 171 पिलर बनेंगे। इनमें से 113 का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। जबकि पांच पिलर बनकर तैयार हो गए हैं। इसमें बकौर की ओर से 36 पिलर और भेजा की ओर से 87 पिलर रहेंगे। बकौर की ओर से 2.1 किलोमीटर और भेजा की तरफ से एक किलोमीटर एप्रोच पथ का निर्माण किया जाना है। बता दें कोसी नदी की धारा के बदलते स्वभाव को देखते हुए पुल के दो ओर बने तटबंध से सीधे जोड़ा जा रहा है। इस कारण यह देश का सबसे लंबा पुल होगा।

2023 के सितंबर में चालू हो जाएगा पुल भारत माला प्रोजेक्ट से मधुबनी के उमगांव से सहरसा के महिषी तारापीठ के बीच निर्माणाधीन फोरलेन सड़क से एलाइनमेंट में यह पुल है। इस से कारण यह नेपाल, बांग्लादेश और भूटान के साथ उत्तर-पूर्व राज्यों को जोड़ने में कारगर सिद्ध होगा। इस पुल के बनने के बाद बागडोगरा एयरपोर्ट पर आना-जाना काफी आसान हो जाएगा। एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रदीप कश्यप ने कहा कि कोविड-19 के कारण निर्माण कार्य में देरी हुई है। अब यह पुल 2023 के सितंबर तक चालू हो जाएगा। पुल का निर्माण कार्य 25 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। गौरतलब है कि भारत माला प्रोजेक्ट के तहत बिहार में चार एक्सप्रेस-वे भी बन रहे हैं। इन एक्सप्रेस-वे के बनने से बिहार के किसी भी हिस्से से कोलकाता और दिल्ली की दूरी काफी घट जाएगी। इसके साथ अंतरराज्यीय आवागमन बेहद आसान हो जाएगा। इनमें से एक एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य चल रहा है। जबकि अन्य का डीपीआर बनाया जा रहा है। अगले साल के पहले महीने से दो पटना-कोलकाता एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।

 

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